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भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को नॉर्वे का समर्थन, ट्रंप के ‘नोबेल’ दावों पर दिया दो-टूक जवाब


🟠 वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका

भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन लगातार बढ़ रहा है। अब नॉर्वे ने भी इस समझौते के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है। भारत में नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि यह समझौता भारत-यूरोप आर्थिक रिश्तों के लिए ऐतिहासिक साबित होगा और नॉर्वे समेत पूरे यूरोपीय क्षेत्र को इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।


🟠 EU का हिस्सा नहीं, फिर भी समर्थन क्यों?

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में राजदूत स्टेनर ने स्पष्ट किया कि नॉर्वे भले ही यूरोपीय संघ का सदस्य नहीं है, लेकिन वह यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) का हिस्सा है।

उन्होंने बताया कि भारत-EFTA के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) 1 अक्टूबर से लागू हो चुका है, जो दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर है।

👉 उनका कहना था कि भारत-EU FTA से पूरे यूरोप के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते और मजबूत होंगे, जिसका सीधा असर नॉर्वे पर भी पड़ेगा।


🟠 मुक्त व्यापार बनाम संरक्षणवाद

वैश्विक आर्थिक हालात पर बात करते हुए नॉर्वे की राजदूत ने मुक्त व्यापार का खुलकर समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि नॉर्वे जैसी छोटी और खुली अर्थव्यवस्था को नियम-आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था से सबसे अधिक फायदा हुआ है।

👉 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों पर परोक्ष टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि
“व्यापार बाधाएं बढ़ाना वैश्विक अनिश्चितता का समाधान नहीं है।”


🟠 ट्रंप के ‘नोबेल’ दावे पर नॉर्वे का जवाब

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार बताने पर राजदूत स्टेनर ने साफ शब्दों में स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि

  • नोबेल पुरस्कार चयन में नॉर्वे सरकार की कोई भूमिका नहीं होती
  • नॉर्वेजियन नोबेल समिति पूरी तरह स्वतंत्र संस्था है
  • किसी भी राजनीतिक दबाव या सरकार का इसमें हस्तक्षेप नहीं होता

उनका कहना था कि नोबेल पुरस्कार को एक स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय सम्मान बने रहना चाहिए।


🟠 ग्रीनलैंड और गाजा पर नॉर्वे का रुख

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टेनर ने कहा कि नॉर्वे, डेनमार्क की संप्रभुता का समर्थन करता है और ग्रीनलैंड को डेनिश साम्राज्य का हिस्सा मानता है।

उन्होंने यह भी कहा कि नॉर्वे नाटो के ढांचे के भीतर आर्कटिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है।

गाजा को लेकर ट्रंप की प्रस्तावित “बोर्ड ऑफ पीस” पहल पर उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि यह समझना जरूरी है कि यह पहल संयुक्त राष्ट्र की संरचनाओं से कैसे जुड़ती है।


🟠 भारत-नॉर्वे टेक और AI सहयोग

राजदूत ने पुष्टि की कि नॉर्वे अगले महीने भारत में होने वाले AI शिखर सम्मेलन में भाग लेगा।

👉 नॉर्वे की डिजिटलीकरण मंत्री, बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आएंगी, जिससे दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।


🟠 पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा

स्टेनर ने यह भी पुष्टि की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस वर्ष के अंत में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए नॉर्वे आने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि नए व्यापार समझौतों और बढ़ती आर्थिक दिलचस्पी के चलते भारत-नॉर्वे संबंध एक स्थिर और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


🟠 भारत-यूरोप समीकरण क्यों अहम

भारत-EU FTA सिर्फ व्यापार समझौता नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

  • अमेरिका में संरक्षणवाद
  • चीन-पश्चिम तनाव
  • यूरोप की नई सप्लाई चेन जरूरतें

इन सबके बीच भारत एक भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

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