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Vijay की ‘जन नायकन’ की तरह 20 साल पहले सेंसर में फंसी थी ये ब्लॉकबस्टर, डायरेक्टर को गिरवी रखना पड़ा था घर


तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ इन दिनों सेंसर बोर्ड की वजह से चर्चा में है। सीबीएफसी की आपत्तियों के चलते फिल्म की रिलीज टलती जा रही है।
लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़ी फिल्म को सेंसरशिप की मुश्किलों का सामना करना पड़ा हो। आज से करीब 20 साल पहले एक ऐसी ही बॉलीवुड फिल्म सेंसर बोर्ड में अटक गई थी, जिसके लिए डायरेक्टर को अपना घर तक गिरवी रखना पड़ा था।
रिलीज के बाद वही फिल्म इतिहास बन गई—हम बात कर रहे हैं ‘रंग दे बसंती’ की।


🇮🇳 26 जनवरी 2006 को रिलीज हुई थी ‘रंग दे बसंती’

जो बन गई थी युवाओं की आवाज

आमिर खान, आर. माधवन, शरमन जोशी, सिद्धार्थ और अतुल कुलकर्णी स्टारर फिल्म ‘रंग दे बसंती’ 26 जनवरी 2006 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी यह फिल्म देशभक्ति, सिस्टम से टकराव और युवा सोच की प्रतीक बन गई।

इस साल फिल्म अपनी रिलीज के 20 साल पूरे करने जा रही है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी राह भी सेंसर बोर्ड ने आसान नहीं रहने दी थी।


🏠 फिल्म के लिए डायरेक्टर ने गिरवी रखा था घर

रिस्क बहुत बड़ा था

करीब 30 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म के लिए राकेश ओमप्रकाश मेहरा को भारी आर्थिक जोखिम उठाना पड़ा।
एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताया था कि फिल्म को पूरा करने के लिए उन्हें अपना घर तक गिरवी रखना पड़ा था

रिस्क इतना बड़ा था कि अगर फिल्म नहीं चलती, तो उनकी निजी जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो सकती थी।


✂️ सेंसर बोर्ड की आपत्तियां

सेना से जुड़े सीन बने वजह

फिल्म के रिलीज से पहले CBFC ने कुछ दृश्यों पर आपत्ति जताई थी।
खासतौर पर सेना और सिस्टम से जुड़े कुछ सीन्स को लेकर सेंसर बोर्ड, नौकरशाही और रक्षा मंत्रालय तक ने सवाल खड़े किए थे।

इसी वजह से ‘रंग दे बसंती’ अपनी तय रिलीज डेट से देर से सिनेमाघरों में पहुंची
डायरेक्टर के मुताबिक, उस वक्त यह उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती थी।


💥 रिलीज के बाद बदला इतिहास

बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट

सेंसर विवादों के बावजूद, रिलीज के बाद फिल्म ने ज़बरदस्त असर छोड़ा।

  • वर्ल्डवाइड कलेक्शन: 96.90 करोड़ रुपये
  • युवाओं के बीच जबरदस्त लोकप्रियता
  • देशभक्ति फिल्मों की परिभाषा बदली

आज भी ‘रंग दे बसंती’ को हिंदी सिनेमा की कल्ट क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है।


🎞️ अब ‘जन नायकन’ फंसी है उसी राह पर

विजय की आखिरी फिल्म पर संकट

ठीक इसी तरह अब थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ सेंसर बोर्ड की आपत्तियों में उलझी हुई है।
फिल्म 18 दिसंबर 2025 से CBFC की मंजूरी का इंतजार कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक—

  • कुछ सीन और डायलॉग पर आपत्ति
  • धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत
  • पहले U/A 16+ सर्टिफिकेट मिला
  • मेकर्स ने दोबारा रिव्यू के लिए भेजी फिल्म

मामला रिवाइजिंग कमेटी और फिर अदालत तक पहुंच गया।


⚖️ कोर्ट तक पहुंचा मामला

रिलीज पर अब भी सस्पेंस

मद्रास हाईकोर्ट ने फिल्म को जल्द पास करने का आदेश दिया था, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने इस फैसले पर रोक लगा दी।
फिलहाल ‘जन नायकन’ की रिलीज डेट को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

खास बात यह है कि यह थलपति विजय के फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म बताई जा रही है। इसके बाद वे अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के जरिए 2026 का तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ने वाले हैं।


इतिहास खुद को दोहराता है?

‘रंग दे बसंती’ और ‘जन नायकन’ की कहानी यह दिखाती है कि
👉 जो फिल्में सिस्टम से सवाल पूछती हैं,
👉 वही सबसे पहले सिस्टम की कसौटी पर खड़ी होती हैं।

अब देखने वाली बात होगी कि क्या जन नायकन भी ‘रंग दे बसंती’ की तरह विवादों से निकलकर इतिहास रच पाएगी।

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