पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी: हरियाणा की कहानी दोहर सकती है?
पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी संगठन में दलितों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया, जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश के नेताओं को दिल्ली बुलाकर बैठक की।
दिल्ली में हुई बैठक
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और प्रभारी भूपेश बघेल ने पंजाब के सभी बड़े नेताओं को बुलाया।
- बैठक में अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग, प्रताप सिंह बाजवा, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत अन्य नेता शामिल थे।
- आलाकमान ने साफ किया कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा और चुनाव में पार्टी सामूहिक नेतृत्व के तहत उतरेगी।
गुटबाजी का कारण
- चन्नी ने दलितों के संगठन में प्रतिनिधित्व न मिलने का मुद्दा उठाया।
- पंजाब में लगभग 35% आबादी दलित है, इसलिए यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला बन गया।
- कांग्रेस आलाकमान ने कहा कि सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारना फिलहाल तय नहीं है।
हरियाणा की चेतावनी
- कांग्रेस आलाकमान के लिए पंजाब की स्थिति हरियाणा के चुनाव की याद दिला रही है, जहां शैलजा और भूपिंदर सिंह की कलह के कारण पार्टी हार गई थी।
- पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर के बयान भी पार्टी के लिए चुनौती पैदा कर रहे हैं।
बीजेपी की स्थिति
- बीजेपी चुपचाप पंजाब की गुटबाजी का फायदा उठाने की रणनीति देख रही है।
- बीजेपी के वरिष्ठ नेता पूर्व कांग्रेसी हैं और गठबंधन के लिए अवसर तलाश रहे हैं।
- पंजाब में बीजेपी और अकाली दल के बीच गठबंधन तय माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब में स्थिति को स्थिर करने की कोशिश की है, लेकिन यदि नेताओं के बीच आपसी टकराव जारी रहा, तो हरियाणा जैसा परिदृश्य पंजाब में भी दोहराया जा सकता है।