केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भी जांच कर सकती है ACB, CBI की अनुमति जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) के अधिकार क्षेत्र को लेकर बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि अपराध राज्य की सीमा के भीतर हुआ है तो राज्य की ACB केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भी FIR दर्ज कर जांच और चार्जशीट दाखिल कर सकती है। इसके लिए CBI की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं है।
ACB के अधिकार क्षेत्र को दी गई थी चुनौती
यह मामला राजस्थान एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामलों से जुड़ा था। आरोपियों ने दलील दी थी कि ACB को न तो FIR दर्ज करने का अधिकार है और न ही बिना CBI की स्वीकृति के जांच करने का। उनका कहना था कि केंद्रीय कर्मचारियों के मामलों में केवल CBI ही वैध जांच एजेंसी है।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 3 अक्टूबर 2025 को इन दलीलों को खारिज करते हुए ACB की कार्रवाई को वैध ठहराया था। इसके बाद आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में दो विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दाखिल कीं, जिन्हें सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के सामने उठे अहम कानूनी सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दो प्रमुख प्रश्न रखे गए—
- क्या राज्य की ACB को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केंद्रीय कर्मचारियों की जांच का अधिकार है?
- क्या CBI की अनुमति के बिना ACB द्वारा दायर चार्जशीट के आधार पर आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट जवाब
न्यायमूर्ति जेबी पारडीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा कि ACB को आपराधिक मामले दर्ज करने, जांच करने और आरोप-पत्र दाखिल करने का पूर्ण अधिकार है, भले ही आरोपी केंद्रीय सरकार का कर्मचारी ही क्यों न हो। अदालत ने यह तर्क सिरे से खारिज कर दिया कि ऐसे मामलों में केवल CBI ही जांच कर सकती है।
धारा 17-A पर भी अदालत की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A को अवैध रिश्वत मांगने के मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की दलीलों को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए और इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है।
न्यायालय ने क्यों मानी हाईकोर्ट की दलील सही
शीर्ष अदालत ने माना कि राजस्थान हाईकोर्ट ने ACB के अधिकार क्षेत्र को मान्यता देते हुए सही कानूनी दृष्टिकोण अपनाया था। ACB द्वारा की गई जांच और दाखिल चार्जशीट को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
फैसले का व्यापक कानूनी और प्रशासनिक असर
यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य की जांच एजेंसियां केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामलों में स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकती हैं। इससे भ्रष्टाचार के मामलों में जांच प्रक्रिया तेज होने और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह स्थापित हो गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकार क्षेत्र को लेकर तकनीकी आपत्तियों के आधार पर जांच को रोका नहीं जा सकता। यदि अपराध राज्य की सीमा में हुआ है, तो ACB को पूरी संवैधानिक और कानूनी शक्ति प्राप्त है।