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आवारा कुत्तों पर टिप्पणी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी को लगाई फटकार, जानिए सुनवाई में क्या-क्या हुआ…


सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर अहम सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं और विभिन्न पक्षों की दलीलों के बीच अदालत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर संतुलन बनाए रखने की बात कही।


मेनका गांधी की टिप्पणी पर कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सार्वजनिक आलोचना पर कड़ी आपत्ति जताई। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अदालत की अवमानना के दायरे में आती हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मेनका गांधी के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई न करना अदालत की उदारता है


वकील और जज के बीच तीखी बहस

मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री रही हैं। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने सवाल उठाया कि क्या यह देखा गया है कि उनकी मुवक्किल किस तरह के बयान दे रही हैं। कोर्ट ने यहां तक कहा कि अदालत गंभीर थी, कोई व्यंग्यात्मक टिप्पणी नहीं की गई थी


बजट आवंटन पर उठे सवाल

जस्टिस संदीप मेहता ने मेनका गांधी की भूमिका पर सवाल करते हुए कहा कि जब वे मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता रही हैं, तो आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए बजटीय आवंटन का उल्लेख उनके आवेदन में क्यों नहीं है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इस दिशा में उनका ठोस योगदान क्या रहा है।


‘कुत्ते को प्रमाण पत्र क्यों नहीं?’— जस्टिस मेहता की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने तकनीकी जांच और उपायों की बात की। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते?”
इस टिप्पणी को लेकर बाद में बहस भी हुई कि अदालत की टिप्पणियों को किस संदर्भ में लिया जाना चाहिए।


समाधान को लेकर अलग-अलग सुझाव

सुनवाई में कई वकीलों ने अपने-अपने सुझाव रखे। किसी ने नीदरलैंड मॉडल अपनाने की बात कही, तो किसी ने हर शहर में हेल्पलाइन और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया। वहीं कुछ याचिकाकर्ताओं ने आवारा कुत्तों से हो रही परेशानियों—नींद न आना, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना—का मुद्दा भी उठाया।


सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर है और इसे हल्के या भावनात्मक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर संतुलित और व्यावहारिक समाधान चाहता है, जिसमें मानव सुरक्षा और पशु कल्याण—दोनों का ध्यान रखा जाए।

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