छत्तीसगढ़ में डीएसपी-कारोबारी कनेक्शन का बड़ा खुलासा, गृह विभाग पहुंची 1480 पन्नों की जांच रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। दंतेवाड़ा में तैनात डीएसपी कल्पना वर्मा और होटल कारोबारी दीपक टंडन के बीच कथित अवैध संबंधों और लेन-देन की जांच पूरी हो चुकी है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनकी रिपोर्ट अब गृह विभाग तक पहुंच चुकी है।
जांच पूरी, 1480 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई
डीएसपी कल्पना वर्मा और कारोबारी दीपक टंडन के बीच विवाद की जांच एएसपी कीर्तन राठौर द्वारा की गई थी। तबादले के बाद रायपुर से राजनांदगांव रवाना होने से पहले एएसपी राठौर ने 1480 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट दंतेवाड़ा एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह को सौंपी। इसके बाद रायपुर पुलिस ने यह रिपोर्ट राज्य के गृह विभाग को भेज दी है।
कारोबारी से थे घनिष्ठ संबंध, पैसों और उपहारों का खुला लेन-देन
जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि डीएसपी कल्पना वर्मा और होटल कारोबारी दीपक टंडन के बीच घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंध थे। कारोबारी ने डीएसपी को नकद रकम के अलावा महंगे उपहार दिए। जांच एजेंसी के अनुसार, यह लेन-देन केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें कई नियमों का उल्लंघन किया गया।
12 लाख की डायमंड रिंग सहित करोड़ों के उपहार
रिपोर्ट के मुताबिक कारोबारी टंडन ने डीएसपी को—
- 12 लाख रुपये की डायमंड रिंग
- करीब 5 लाख रुपये के सोने के आभूषण
- एक लग्जरी कार
- महंगा मोबाइल फोन
उपहार में दिए थे। कारोबारी का दावा है कि उसने डीएसपी पर कुल मिलाकर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए।
विभाग और आयकर को नहीं दी जानकारी, नियमों का उल्लंघन
जांच में सामने आया कि डीएसपी वर्मा ने इन महंगे उपहारों और नकद लेन-देन की जानकारी न तो अपने विभाग को दी और न ही आयकर विभाग को। जबकि सरकारी सेवा नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को ऐसे उपहारों और संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य होता है।
नक्सल ऑपरेशन की गोपनीय जानकारियां भी की लीक
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि डीएसपी पर दंतेवाड़ा नक्सल ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं लीक करने का भी आरोप साबित हुआ है। जांच में पाया गया कि डीएसपी ने कारोबारी टंडन को संवेदनशील रिपोर्ट और जानकारियां व्हाट्सएप के जरिए भेजी थीं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला है।
परिवार के सदस्यों से भी लेन-देन
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कारोबारी टंडन का डीएसपी के भाई और पिता से भी आर्थिक लेन-देन रहा है। इससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
बचाव में ठोस सबूत नहीं दे सकीं डीएसपी
जांच के दौरान डीएसपी कल्पना वर्मा अपने बचाव में कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाईं। अधिकांश आरोपों को जांच में तथ्यात्मक रूप से सही पाया गया है।
डीएसपी-कारोबारी संबंधों का यह मामला केवल नैतिकता का नहीं, बल्कि पुलिस विभाग की विश्वसनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। अब सभी की नजरें गृह विभाग के अगले कदम और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।