#क्राइम #देश दुनिया #राज्य-शहर

राजस्थान में भर्ती घोटाले की परतें खुलीं, 2018 की तीन परीक्षाओं में OMR फर्जीवाड़ा, चयन बोर्ड के अफसर समेत 5 गिरफ्तार….

राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गहलोत सरकार के कार्यकाल में कराई गई तीन अहम भर्तियों में OMR शीट से छेड़छाड़ कर अंकों में भारी बढ़ोतरी किए जाने का खुलासा हुआ है। एसओजी की जांच में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के उपनिदेशक समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिससे पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


2018 की तीन भर्तियों में OMR से खेल, नंबर बढ़ाकर कराया चयन

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा वर्ष 2018 में आयोजित सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता), लैब सहायक और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है। एसओजी जांच में पाया गया कि OMR शीट की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के दौरान जानबूझकर अंकों में हेरफेर किया गया।


चयन बोर्ड के उपनिदेशक समेत 5 आरोपी गिरफ्तार

एसओजी ने इस मामले में बोर्ड के उपनिदेशक (सिस्टम एनालिस्ट) संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल, दलाल शादान खान, विनोद गौड़ और अभ्यर्थी पूनम माथुर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया और फेल अभ्यर्थियों को पास करवा दिया।


38 अभ्यर्थियों के 119 से 265 तक बढ़ाए गए अंक

जांच में सामने आया कि कुल 38 अभ्यर्थियों के अंकों में 119 से लेकर 265 तक की बढ़ोतरी की गई। कुछ अभ्यर्थी जो फेल थे, वे टॉपरों की सूची में तक पहुंच गए। आरोपी पूनम माथुर के वास्तविक 63 अंक थे, जिन्हें फर्जीवाड़े के जरिए 182 दिखाया गया, यानी सीधे 119 अंक बढ़ा दिए गए


फोटोशॉप और सिस्टम डेटा से की गई छेड़छाड़

एसओजी के अनुसार, स्कैनिंग के बाद कंप्यूटर सिस्टम में स्टोर डेटा से छेड़छाड़ की गई। चुनिंदा अभ्यर्थियों के उत्तर फोटोशॉप सॉफ्टवेयर से बदले गए। कई मामलों में 30-50 अंकों को बढ़ाकर 185 से 265 तक दर्शाया गया।


जांच समिति में शामिल था मुख्य आरोपी

एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि तकनीकी प्रमुख संजय माथुर न केवल इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड था, बल्कि वह जांच समिति का सदस्य भी था। उसने आउटसोर्स फर्म और बोर्ड के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।


2024 में गायब हुई मूल OMR शीट

एसओजी को दिसंबर 2024 में शिकायत मिली, जिसके बाद 28 जनवरी 2025 को केस दर्ज किया गया। जांच में चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि तीनों परीक्षाओं की मूल OMR शीट गायब थी। बोर्ड में केवल अन्य रिकॉर्ड मिले, जिनसे 38 संदिग्ध चयन सामने आए।


यूपी STF पहले ही पकड़ चुकी थी दलाल

गिरफ्तार दलाल शादान और विनोद को यूपी STF ने 15 अगस्त 2019 को पकड़ा था। उनके पास से 61.50 लाख रुपए, तीनों भर्तियों की OMR शीट, अभ्यर्थियों की सूची और व्हाट्सएप चैट बरामद हुई थी। इसके बावजूद उस समय चयन बोर्ड ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई थी।


18 अभ्यर्थियों से 8-8 लाख लेकर कराया गया चयन

पूछताछ में सामने आया कि गिरोह ने 18 अभ्यर्थियों से प्रति उम्मीदवार 8 लाख रुपए लेकर OMR शीट में सही उत्तर भरे। नतीजा यह हुआ कि सभी 18 अभ्यर्थियों का चयन हो गया।


फिलहाल मामले की जांच डीआईजी अनिल परिस देशमुख के निर्देशन में इंस्पेक्टर यशवंत यादव कर रहे हैं। एसओजी का कहना है कि इस घोटाले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई और राज खुलने की संभावना है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *