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नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: गरियाबंद में बलदेव-मंजू समेत 9 नक्सलियों का सरेंडर

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गरियाबंद जिले से सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यहां पुलिस के सामने 9 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिनमें कुख्यात नक्सली बलदेव और मंजू भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि परिवार की भावनात्मक अपील और लगातार दबाव के चलते इन नक्सलियों ने हथियार डालने का फैसला किया।


🟠 गरियाबंद पुलिस के सामने किया आत्मसमर्पण

मंगलवार को गरियाबंद पुलिस के समक्ष कुल 9 नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें 6 महिला नक्सली और 3 पुरुष नक्सली शामिल हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में बलदेव और मंजू जैसे सक्रिय नक्सलियों के नाम सामने आए हैं।


महिला नक्सलियों की बढ़ती संख्या में सरेंडर यह दिखाता है कि संगठन के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।


🟠 परिवार की अपील बनी सरेंडर की बड़ी वजह

सूत्रों के मुताबिक नक्सली बलदेव और मंजू के परिजनों ने लंबे समय से उनसे मुख्यधारा में लौटने की अपील की थी। साथ ही पहले सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने भी दोनों से हिंसा का रास्ता छोड़ने का आग्रह किया।


नक्सल उन्मूलन में अब केवल हथियार नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रणनीति भी असर दिखा रही है।


बलदेव और मंजू के सरेंडर को लेकर NDTV ने सोमवार को ही प्रमुखता से खबर प्रसारित की थी। इसके बाद मंगलवार को यह आत्मसमर्पण औपचारिक रूप से पूरा हुआ।

यह दिखाता है कि नक्सली संगठनों के भीतर सरेंडर को लेकर पहले से बातचीत और तैयारी चल रही थी।


🟠 2025 में नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका

केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त अभियान के तहत वर्ष 2025 में अब तक

  • 256 नक्सली मारे जा चुके हैं
  • 1500 से अधिक नक्सली सरेंडर कर चुके हैं

लगातार कार्रवाई और सरेंडर से नक्सली संगठनों की रीढ़ टूटती नजर आ रही है।


🟠 पुनर्वास नीति से मुख्यधारा की ओर लौट रहे नक्सली

छत्तीसगढ़ सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति, रोजगार के अवसर और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने कई नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।


सख्ती के साथ-साथ पुनर्वास का संतुलन नक्सल समस्या के समाधान की प्रभावी रणनीति बन रहा है।


🟠 मार्च 2026 तक नक्सल उन्मूलन का लक्ष्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ से नक्सलियों को पूरी तरह खत्म करने की समयसीमा मार्च 2026 तय की है। एंटी-नक्सल ऑपरेशन के असर से या तो नक्सली सरेंडर कर रहे हैं या मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं।


लगातार दबाव और सीमित समयसीमा ने नक्सली संगठनों को कमजोर और हतोत्साहित किया है।


🟠 सुरक्षा बलों की नकेल से कमजोर पड़ा नक्सल संगठन

सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, खुफिया नेटवर्क और लगातार अभियानों के चलते नक्सली संगठन अब बुरी तरह कमजोर हो चुके हैं।

यह सरेंडर नक्सल उन्मूलन की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

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