Jhalawar Crime: भैंसों के तबेले में आधी रात को पकड़ा गया एमडीएम फैक्ट्री, 25 करोड़ का माल बरामद..
झालावाड़ जिले में पुलिस ने एक ऐसा खुलासा किया है जिसने जिले से लेकर प्रदेश तक हलचल मचा दी। आमलियाखेड़ा गांव के खेत में बने एक साधारण भैंसों के तबेले की आड़ में एमडीएम (मादक पदार्थ) बनाने की अवैध फैक्ट्री चलाई जा रही थी। पुलिस की संयुक्त टीम ने जब देर रात दबिश दी तो अंदर रसायनों और तैयार ड्रग्स का ज़खीरा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। बरामद माल की कीमत लगभग 25 करोड़ रुपए आंकी गई है।
आधी रात छापेमारी में मिला बड़ा नेटवर्क
भवानीमंडी और मिश्रोली थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शुक्रवार रात यह फैक्ट्री पकड़ी। तबेला बाहर से पूरी तरह साधारण दिख रहा था, ताकि किसी को शक न हो। अंदर एक टापरी में अवैध रूप से एमडीएम तैयार किया जा रहा था। पुलिस को इसकी पुख्ता जानकारी मुखबिर से मिली थी, जिसके बाद टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं।
भाग निकले मुख्य आरोपी, पुलिस ने दर्ज किया केस
छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी गोपाल सिंह और उसके साथी नरेन्द्र सिंह (झिझनी निवासी) और दिनेश सिंह (निपानिया हाड़ा निवासी) मौके से फरार हो गए। ये तीनों इस रैकेट से सीधे जुड़े हुए थे। पुलिस ने इनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश तेज कर दी है।
तबेले से मिला 2 किलो एमडीएम और 130 लीटर केमिकल
तलाशी के दौरान पुलिस ने लगभग दो किलो तैयार एमडीएम पदार्थ, 130 लीटर संदिग्ध केमिकल और बड़ी मात्रा में पाउडर जब्त किया। इसके साथ गैस चूल्हा, सिलेंडर, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, बर्तन और अन्य उपकरण मिले, जिनसे यह साफ हो गया कि यहां लंबे समय से अवैध उत्पादन चल रहा था। बरामद सामग्री की बाजार कीमत लगभग 25 करोड़ रुपए बताई गई है।
वाहन भी जब्त—आवागमन का अलग नेटवर्क तैयार
पुलिस ने घटनास्थल से एक कार और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की है। आशंका है कि इन्हें माल की सप्लाई और डिस्ट्रिब्यूशन में इस्तेमाल किया जा रहा था। वाहनों के दस्तावेजों से पुलिस अब सप्लाई चेन को ट्रेस करने की कोशिश कर रही है। एसपी अमित कुमार ने बताया कि आरोपी दिनेश सिंह के खिलाफ मिश्रोली थाना क्षेत्र में पहले से तीन प्रकरण दर्ज हैं, जबकि नरेन्द्र सिंह के खिलाफ भी एक मामला है।
जिले में नशे के विरुद्ध बड़े अभियान के संकेत
पिछले सात दिनों में झालावाड़ पुलिस ने नशे की तस्करी पर लगातार शिकंजा कसते हुए 20 तस्करों को गिरफ्तार किया है। इससे लगभग 29 करोड़ रुपए मूल्य का मादक पदार्थ और कई वाहन बरामद हुए। एसपी का कहना है कि जिले में विशेष अभियान चलाकर नशे के नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता ड्रग्स प्रोडक्शन का खतरा
यह मामला साबित करता है कि ड्रग्स माफिया अब शहरों से हटकर ग्रामीण इलाकों को नया ठिकाना बना रहे हैं। खेतों, तबेलों और झोपड़ियों की आड़ में बड़े पैमाने पर ड्रग्स का उत्पादन किया जा रहा है ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। ऐसे मामलों में लोकल इंटेलिजेंस और सामुदायिक निगरानी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।