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गणतंत्र दिवस पर EU नेता होंगे मुख्य अतिथि, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते की राह आसान


भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे। 25 से 27 जनवरी तक उनकी राजकीय यात्रा के दौरान 27 जनवरी को 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगने की संभावना है।


यात्रा का कार्यक्रम और राजनीतिक महत्व

यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष कोस्टा और यूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन पीएम मोदी के साथ शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में भाग लेंगे। इसके अलावा, भारत-EU बिजनेस फोरम का आयोजन भी संभावित है, जो आर्थिक सहयोग को मजबूती देगा।


FTA पर केंद्रित शिखर सम्मेलन

शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता है, जिसे औपचारिक रूप से व्यापक-आधारित व्यापार और निवेश समझौता (BTIA) कहा जाता है। इस पर पहली बार 2007 में बातचीत शुरू हुई थी, जो वर्षों तक अटक गई। 2022 में वैश्विक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के साथ बातचीत फिर शुरू हुई, और फरवरी 2025 की वॉन डेर लेयेन की भारत यात्रा में इसे तेज गति मिली।


वार्ता की प्रगति और संवेदनशील मुद्दे

सरकारी सूत्रों के अनुसार 24 में से 20 चैप्टर पर पहले ही सहमति बन चुकी है। केवल कुछ ही मुद्दे शेष हैं, और अगले कुछ दिन अंतिम मोल-भाव के लिए निर्णायक हैं। कृषि जैसे संवेदनशील मुद्दों को समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे भारत और EU के कई सदस्य देशों में घरेलू राजनीतिक चिंताएं कम हो गई हैं।


भारत के लिए FTA का महत्व

यदि समझौते पर मुहर लगती है, तो यह भारत के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक होगा। इससे दोतरफा व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण होगा, खासकर विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और सेवाओं के क्षेत्रों में। हालांकि, कुछ औद्योगिक क्षेत्रों में बाजार पहुंच और EU के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) जैसे जटिल मुद्दे अभी भी बातचीत का हिस्सा हैं।


रणनीतिक और राजनीतिक संकेत

भारत और EU 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं। हाल के वर्षों में संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। अक्टूबर 2025 में EU काउंसिल ने भारत के साथ एक नए रणनीतिक एजेंडे का समर्थन किया था, जिसमें समृद्धि, स्थिरता, सुरक्षा, रक्षा और वैश्विक कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस पृष्ठभूमि में गणतंत्र दिवस समारोह में EU नेताओं की उपस्थिति एक मजबूत राजनीतिक संकेत है।


FTA की घोषणा: दो दशकों की वार्ता का ताज

अगर 27 जनवरी को FTA की घोषणा होती है, तो यह लगभग दो दशक लंबी बातचीत का परिणाम होगा और भारत-EU संबंधों में एक नया अध्याय खोलेगा। विशेषज्ञ इसे रणनीतिक एकता को ठोस आर्थिक परिणामों में बदलने का अवसर मान रहे हैं।

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