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राजस्थान में यूरिया संकट पर किसानों का उबाल, बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ को काले झंडे दिखाने की चेतावनी


राजस्थान में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा सड़कों पर दिखने लगा है। श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र में किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे पूर्व नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ के दौरे के दौरान उन्हें काले झंडे दिखाएंगे और रास्ता रोकेंगे।


1. खाद नहीं मिली तो भड़का आक्रोश

शुक्रवार सुबह से ही किसान नई धान मंडी में यूरिया खाद लेने के लिए कतारों में खड़े रहे। जब घंटों इंतजार के बाद भी खाद नहीं मिली, तो किसान एसडीएम कार्यालय पहुंच गए और विरोध शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख कृषि विभाग के सहायक निदेशक जसवंत सिंह बराड़ और तहसीलदार दिव्या चावला मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने समझाइश की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अड़े रहे।


2. दुकानदारों पर मनमानी और गुमराह करने के आरोप

किसानों का आरोप है कि दुकानदार गोदामों में यूरिया का स्टॉक रोककर रख रहे हैं। जब किसान खाद लेने पहुंचते हैं तो उन्हें एक बार में सिर्फ तीन बैग दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही अन्य उत्पाद जबरन खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है।
प्रदर्शन कर रहे किसान बलराज सिंह राय का कहना है कि मंडी में वितरण हो रहा है, लेकिन दुकानदार सही जानकारी नहीं दे रहे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कृषि विभाग के अधिकारी अपने चहेतों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि आम किसान सुबह से लाइन में लगकर भी खाली हाथ लौट रहा है।


3. बीजेपी नेता के दौरे के विरोध का ऐलान

किसानों ने कहा कि जब भी किसी बड़े नेता का दौरा होता है, तभी अचानक खाद उपलब्ध करा दी जाती है, लेकिन सामान्य दिनों में उनकी समस्याओं को अनसुना कर दिया जाता है।
किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि शनिवार को अनूपगढ़ आने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ के दौरे के दौरान वे उनका रास्ता रोकेंगे और काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराएंगे।


4. विभाग का पक्ष: पांच दुकानों पर वितरण जारी

कृषि विभाग के सहायक निदेशक जसवंत सिंह बराड़ ने बताया कि नई धान मंडी में फिलहाल पांच दुकानों पर यूरिया का वितरण किया जा रहा है। पहले टोकन प्रणाली के जरिए खाद बांटी जा रही थी, लेकिन 15–20 किसानों को टोकन नहीं मिल पाए, जिससे अव्यवस्था बनी।


अनूपगढ़ में यूरिया खाद को लेकर किसानों का गुस्सा अब राजनीतिक विरोध में बदलता दिख रहा है। एक ओर किसान भेदभाव, जमाखोरी और जबरन बिक्री के आरोप लगा रहे हैं, वहीं विभाग सीमित आपूर्ति और व्यवस्था का हवाला दे रहा है। आने वाले दिनों में यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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