क्यूबा पर फिर सख्त हुआ अमेरिका: फिदेल कास्त्रो से ट्रंप तक तख्तापलट की कोशिशों की ‘फिल्मी’ कहानी
वेनेजुएला के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर क्यूबा पर टिकती दिख रही है। तेल और फंड रोकने की धमकी, “डील या नतीजे भुगतने” जैसी भाषा और क्यूबा के नेतृत्व को लेकर तीखे संकेत—इन सबने एक बार फिर दोनों देशों के रिश्तों को सुर्खियों में ला दिया है। लेकिन क्यूबा-अमेरिका टकराव की यह कहानी नई नहीं है। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज तक, वॉशिंगटन ने कई बार क्यूबा में सत्ता परिवर्तन की कोशिशें की हैं—और उनमें से कई योजनाएं इतिहास की सबसे ‘फिल्मी’ साजिशों में गिनी जाती हैं।
🔹 ट्रंप का ताजा दबाव: डील या परिणाम
ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर चेतावनी दी है कि क्यूबा को मिलने वाला तेल और फंड रोका जा सकता है। उनका संदेश साफ है—अमेरिका के साथ समझौता करें या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। यह बयान ऐसे समय आया है जब लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव को फिर से मजबूत करने की कोशिशें तेज बताई जा रही हैं।
🔹 “क्यूबा का राष्ट्रपति रुबियो?”—एक राजनीतिक संकेत
इसी कड़ी में ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लेकर एक टिप्पणी साझा की, जिसमें मजाकिया अंदाज में उन्हें क्यूबा का राष्ट्रपति बनाए जाने का सुझाव था। रुबियो के माता-पिता क्यूबा से आए हैं, इसलिए यह टिप्पणी केवल हास्य नहीं, बल्कि क्यूबा की राजनीति पर अमेरिकी सोच का संकेत भी मानी गई। क्यूबा की सरकार ने ट्रंप की भाषा को खारिज करते हुए संप्रभुता की रक्षा का संकल्प दोहराया।
🔹 दुश्मनी का पुराना इतिहास: कम से कम 10 तख्तापलट की कोशिशें
अमेरिका और क्यूबा के बीच टकराव दशकों पुराना है। डिक्लासिफाइड दस्तावेजों और क्यूबा की खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन ने क्यूबा में सत्ता परिवर्तन के लिए कई बार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रयास किए—कभी सैन्य आक्रमण के जरिए, तो कभी गुप्त अभियानों और हत्या की साजिशों के माध्यम से।
🔹 बे ऑफ पिग्स (1961): सबसे चर्चित नाकाम हमला
अप्रैल 1961 में हुआ बे ऑफ पिग्स इनवेजन क्यूबा में फिदेल कास्त्रो की सरकार को गिराने की अमेरिकी समर्थित कोशिश थी। CIA ने क्यूबाई निर्वासितों की एक टुकड़ी को प्रशिक्षण और फंड दिया, लेकिन स्थानीय समर्थन न मिलने और सीमित अमेरिकी हवाई मदद के कारण यह अभियान तीन दिनों में ही विफल हो गया। इस नाकामी ने वॉशिंगटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा किया और क्यूबा-सोवियत रिश्तों को और मजबूत किया, जिसकी परिणति आगे चलकर क्यूबा मिसाइल संकट (1962) के रूप में हुई।
🔹 ऑपरेशन मोंगूज (1961–62): पर्दे के पीछे की जंग
बे ऑफ पिग्स के बाद अमेरिकी प्रशासन ने क्यूबा के खिलाफ एक गुप्त अभियान शुरू किया, जिसे ऑपरेशन मोंगूज कहा गया। इसका उद्देश्य था—आर्थिक तोड़फोड़, मनोवैज्ञानिक युद्ध और गुप्त कार्रवाइयों के जरिए कास्त्रो सरकार को अस्थिर करना। यह अभियान भी अपने लक्ष्य में सफल नहीं हो पाया और अंततः बंद कर दिया गया।
🔹 कास्त्रो को हटाने की ‘फिल्मी’ साजिशें
इस दौर में फिदेल कास्त्रो को निशाना बनाने के लिए कई ऐसी योजनाएं बनाई गईं, जो जासूसी फिल्मों की पटकथा जैसी लगती हैं—
- विस्फोटक सिगार: ऐसा सिगार, जो जलते ही फट जाए।
- जहरीला मिल्कशेक: होटल में परोसे जाने वाले पेय में ज़हर मिलाने की योजना।
- जहरीला डाइविंग सूट: टीबी बैक्टीरिया और दूषित उपकरणों से लैस वेटसूट।
- विस्फोटक समुद्री सीप: जहां कास्त्रो गोताखोरी करते थे, वहां विस्फोटक शंख रखने की योजना।
- पूर्व प्रेमी के जरिए हमला: एक करीबी को ज़हर देने के लिए उकसाने की कोशिश।
- चरित्र हनन: सार्वजनिक छवि बिगाड़ने और यहां तक कि दाढ़ी उखाड़ने जैसी योजनाएं।
इनमें से कई योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पाईं या अत्यधिक जोखिमभरी बताकर रोक दी गईं।
🔹 कितनी बार बनाया गया निशाना?
1975 की अमेरिकी चर्च कमेटी ने पुष्टि की थी कि 1960 से 1965 के बीच CIA ने कास्त्रो की हत्या की कम से कम आठ साजिशें रचीं। वहीं क्यूबा के काउंटर-इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख फैबियन एस्केलांटे का दावा है कि कुल मिलाकर सैकड़ों बार कास्त्रो को मारने की कोशिश हुई। उनके अनुसार, केवल निक्सन काल में ही दर्जनों प्रयास किए गए।
🧠 इतिहास से सबक या फिर वही पुरानी रणनीति?
ट्रंप के हालिया बयान यह संकेत देते हैं कि क्यूबा को लेकर अमेरिकी नीति एक बार फिर सख्ती की ओर बढ़ रही है। इतिहास बताता है कि सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंध और गुप्त अभियानों के बावजूद क्यूबा में सत्ता परिवर्तन आसान नहीं रहा है।
फिदेल कास्त्रो के दौर में बनाई गई असफल योजनाएं यह दिखाती हैं कि बाहरी हस्तक्षेप अक्सर क्यूबा के भीतर राष्ट्रवाद को और मजबूत करता रहा है। ऐसे में आज का सवाल यही है—क्या वॉशिंगटन कूटनीति और संवाद का रास्ता अपनाएगा, या फिर दशकों पुरानी दबाव की रणनीति दोहराएगा? आने वाले महीनों में क्यूबा-अमेरिका संबंध इसी कसौटी पर परखे जाएंगे।