#क्राइम #देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर #हेल्थ न्यूज़

“सड़क हादसों में ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज: PM मोदी करेंगे राष्ट्रीय योजना लॉन्च”


सड़क दुर्घटनाओं में समय पर इलाज न मिल पाने से होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ी पहल करने जा रही है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे, जिसके तहत पीड़ितों को इलाज के लिए जेब से पैसा नहीं देना होगा।


1️⃣ क्यों ज़रूरी है यह योजना

“इलाज की कमी से जाती हैं हजारों जानें”
देश में हर साल करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। बड़ी संख्या में मौतें केवल इसलिए होती हैं क्योंकि समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती। कई बार पीड़ित के साथ न तो परिवार होता है और न ही तत्काल इलाज के लिए जरूरी धन—यहीं से यह योजना जीवनरक्षक साबित हो सकती है।


2️⃣ प्रधानमंत्री करेंगे औपचारिक लॉन्च

“पायलट के बाद राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार”
नितिन गडकरी ने बताया कि योजना का पायलट प्रोजेक्ट पहले से चल रहा है और अब प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही इसे देशभर में लागू करेंगे। उद्देश्य स्पष्ट है—दुर्घटना के तुरंत बाद इलाज की राह में पैसे की बाधा न रहे।


3️⃣ किन दुर्घटनाओं पर लागू होगी स्कीम

“हर सड़क, हर मोटर वाहन दुर्घटना कवर”
यह योजना किसी भी श्रेणी की सड़क पर मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सभी सड़क दुर्घटनाओं पर लागू होगी। ऐसी किसी भी दुर्घटना का शिकार व्यक्ति योजना के प्रावधानों के तहत कैशलेस उपचार का हकदार होगा, जिससे अस्पताल में भर्ती होने में देरी कम होगी।


4️⃣ कितना मिलेगा कैशलेस इलाज

“7 दिन तक ₹1.5 लाख का नकद-रहित उपचार”
सड़क परिवहन मंत्रालय की ‘सड़क दुर्घटना पीड़ितों की कैशलेस उपचार योजना, 2025’ के तहत प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों की अवधि के लिए प्रति दुर्घटना ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलेगा।


5️⃣ पायलट प्रोजेक्ट का अनुभव

“चंडीगढ़ से छह राज्यों तक”
मंत्रालय ने 14 मार्च 2024 को चंडीगढ़ में इस योजना का पायलट शुरू किया था, जिसे बाद में छह राज्यों तक बढ़ाया गया। इससे यह आकलन किया गया कि अस्पतालों में कैशलेस इलाज कैसे सुचारु रूप से लागू किया जा सकता है।


6️⃣ अब तक कितने मामलों में मिला लाभ

“हजारों को मिला इलाज, करोड़ों की मदद”
पायलट शुरू होने के बाद आए कैशलेस उपचार अनुरोधों में से लगभग 20% मामलों को अस्वीकार किया गया। कुल 6,833 अनुरोधों में से 5,480 पीड़ित पात्र पाए गए। मोटर वाहन दुर्घटना कोष के तहत अब तक ₹73.88 लाख की राशि वितरित की जा चुकी है।


“क्या यह योजना सड़क सुरक्षा में गेम-चेंजर बनेगी?”
यह पहल स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा के बीच की सबसे बड़ी खाई—तुरंत इलाज के खर्च—को पाटने का प्रयास है। यदि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रक्रिया सरल और तेज रखी गई, तो ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज संभव होगा, जिससे मौतों और गंभीर विकलांगता में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। चुनौती यह रहेगी कि पात्रता सत्यापन, पुलिस रिपोर्ट और अस्पतालों को भुगतान की प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी रहे।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *