“ED रेड पर दिल्ली में सियासी टकराव: गृह मंत्रालय के बाहर धरने पर TMC सांसद, हिरासत में”
पश्चिम बंगाल में ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलचल अब राजधानी दिल्ली तक पहुंच गई है। आई-पैक कार्यालय पर छापेमारी के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह घटनाक्रम केंद्र और राज्य के बीच बढ़ते टकराव का नया अध्याय बन गया है।
1️⃣ दिल्ली में विरोध, हिरासत में TMC सांसद
“गृह मंत्रालय के बाहर धरना, पुलिस की कार्रवाई”
आई-पैक कार्यालय पर ईडी की रेड के विरोध में TMC सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। धरने पर बैठे सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने ले जाया।
2️⃣ किन-किन नेताओं को लिया गया हिरासत में
“डेरेक, महुआ समेत कई सांसद शामिल”
हिरासत में लिए गए नेताओं में डेरेक ओ’ब्रायन, शताब्दी रॉय, महुआ मोइत्रा, बापी हलदर, साकेत गोखले, प्रतिमा मंडल, कीर्ति आज़ाद और डॉ. शर्मिला शामिल हैं। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश है।
3️⃣ हिरासत के दौरान नेताओं की प्रतिक्रिया
“विरोध के अधिकार पर सवाल”
हिरासत में लिए जाते समय महुआ मोइत्रा ने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, उसे देश देख रहा है। वहीं, डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन तक नहीं करने दिया जा रहा।
4️⃣ ईडी की रेड का संदर्भ: आई-पैक पर कार्रवाई
“कोयला घोटाले की जांच में छापेमारी”
प्रवर्तन निदेशालय ने कथित कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी-लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत कोलकाता में आई-पैक के सॉल्ट लेक सेक्टर-5 स्थित कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर तलाशी अभियान चलाया। आई-पैक 2019 से तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक परामर्श देने वाली फर्म के रूप में कार्यरत है।
5️⃣ मुख्यमंत्री की मौजूदगी से बढ़ा विवाद
“ममता बनर्जी का दौरा, दस्तावेजों को लेकर दावे”
रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मध्य कोलकाता में प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं। बाहर निकलते समय उन्हें दस्तावेज और एक लैपटॉप ले जाते देखा गया, जिसके बारे में उनका कहना था कि वह तृणमूल कांग्रेस से संबंधित और आगामी चुनावों से जुड़ा है। इसके बाद वे सॉल्ट लेक स्थित आई-पैक कार्यालय भी गईं, जहां उनके साथ मौजूद अधिकारियों को फाइलें और डायरी वाहन में रखते देखा गया।
“जांच एजेंसियां बनाम राजनीतिक विरोध: टकराव की राजनीति”
यह घटनाक्रम दिखाता है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर केंद्र-राज्य टकराव कितना तीखा हो चुका है। एक ओर ईडी इसे कानून के दायरे में चल रही जांच बताती है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। दिल्ली में सांसदों की हिरासत ने इस बहस को और तेज कर दिया है—क्या यह कानून-व्यवस्था का सामान्य कदम है या लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर आघात? आने वाले दिनों में अदालतों और राजनीतिक मंचों पर इसकी गूंज बढ़ना तय है।