रूस पर नए अमेरिकी प्रतिबंध: क्या भारत–चीन पर 500% टैरिफ का खतरा? ट्रंप ने बिल को दी मंजूरी
अमेरिका में रूस के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक कदमों में से एक की तैयारी हो रही है। “सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025” नाम के नए विधेयक को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सहमति मिल चुकी है। इस प्रस्ताव के तहत रूस से तेल और यूरेनियम जैसे उत्पाद खरीदने वाले देशों पर अमेरिका में 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इससे भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
🔹 बिल क्या कहता है?
रूस से व्यापार पर भारी शुल्क का प्रस्ताव
अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस विधेयक का एक अहम प्रावधान यह है कि जो देश जानबूझकर रूस से यूरेनियम, पेट्रोलियम और संबंधित उत्पाद खरीदते हैं, उन पर अमेरिका में आयात होने वाले सामान और सेवाओं पर कम से कम 500% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव बनाना है।
🔹 लिंडसे ग्राहम का दावा
ट्रंप ने बिल को दिखाई हरी झंडी
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने 8 जनवरी को कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले इस द्विदलीय (बाइपार्टिजन) बिल को मंजूरी दे दी है। उन्होंने बताया कि इस पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के सांसद मिलकर काम कर रहे हैं और अगले सप्ताह की शुरुआत में इसे वोटिंग के लिए लाया जा सकता है।
🔹 रूस का साथ देने वालों पर सीधी मार
तेल खरीदने वाले देशों को दंड देने का प्रावधान
ग्राहम के अनुसार, यह विधेयक उन देशों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खोलता है जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन देते हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों का उल्लेख किया और कहा कि नया कानून अमेरिका को इन पर दबाव बनाने का “ताकतवर औज़ार” देगा।
🔹 यूक्रेन युद्ध से जुड़ा टाइमिंग
शांति वार्ता के बीच सख्ती का संकेत
सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह बिल ऐसे समय लाया जा रहा है जब यूक्रेन को लेकर शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं। उनके मुताबिक, रूस की सैन्य कार्रवाइयों के बीच यह कानून मॉस्को पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
🔹 ट्रंप–मोदी टैरिफ तनाव
रूसी तेल पर भारत की खरीद से अमेरिका नाराज़
इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप यह संकेत दे चुके हैं कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच असहमति बनी हुई है। ट्रंप ने कहा था कि उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंध हैं, लेकिन भारत पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ से पीएम मोदी खुश नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने हाल के महीनों में रूस से तेल खरीद कुछ हद तक कम की है।
🔹 भारत पर पहले से ही शुल्क
रूसी तेल को लेकर अमेरिका की सख्ती
वर्तमान में अमेरिका, रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगभग 50% तक का टैरिफ लगा चुका है। वाशिंगटन इसे यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की अर्थव्यवस्था को अप्रत्यक्ष समर्थन मानता है। वहीं भारत का पक्ष है कि वह अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी तेल खरीदता है और यह पूरी तरह व्यावसायिक निर्णय है।
क्या 500% टैरिफ हकीकत बनेगा?
यदि “सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025” पारित होता है, तो यह न केवल रूस बल्कि उसके प्रमुख ऊर्जा खरीदारों के लिए भी बड़ा झटका साबित हो सकता है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देश, जो सस्ते रूसी तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं, पर अमेरिकी बाजार में भारी शुल्क का खतरा पैदा होगा।
हालांकि, यह देखना अहम होगा कि विधेयक में अंतिम रूप में क्या प्रावधान रहते हैं और क्या अमेरिका अपने रणनीतिक साझेदारों पर वास्तव में इतना कठोर कदम उठाएगा। यह मुद्दा आने वाले दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार, कूटनीति और भारत–अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने वाला बन सकता है।