#देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

उस्मान हादी हत्याकांड पर भारत को क्यों घसीट रहे कट्टरपंथी? शेख हसीना ने बताई ‘असल वजह’


बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि उस्मान हादी की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिशें “जानबूझकर, निराधार और खतरनाक” हैं। उनके मुताबिक, यह नैरेटिव कट्टरपंथी ताकतें गढ़ रही हैं, जो देश की आंतरिक शासन विफलताओं से ध्यान हटाकर भारत-विरोध को भड़काना चाहती हैं और दोनों देशों के बीच दशकों से बने भरोसे को कमजोर करने पर आमादा हैं।


📰 शेख हसीना का आरोप: ‘विदेशी साजिश’ बताकर अपनी नाकामी छिपा रहे हैं

शेख हसीना ने कहा कि उस्मान हादी की हत्या को भारत से जोड़ने का प्रयास एक राजनीतिक औज़ार बन गया है। उनका कहना है कि चरमपंथी समूह इस घटना का इस्तेमाल तनाव बढ़ाने, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करने और अंतरिम सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफलता से ध्यान हटाने के लिए कर रहे हैं।
उनके शब्दों में, यह “मनगढ़ंत नैरेटिव” सार्वजनिक बहस को कट्टर बनाता है और भारत-बांग्लादेश के बीच भरोसे को नुकसान पहुंचाता है।


⚠️ हिंसा, उन्मादी भीड़ और लॉ-एंड-ऑर्डर की चुनौती

हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंसक घटनाएं बढ़ी हैं। शेख हसीना के मुताबिक, कई मामलों में कानून के बजाय भीड़ का दबदबा दिख रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों और चुनावी हिंसा ने स्थिति को और गंभीर किया है।
उनका आरोप है कि इन हालात पर निर्णायक कार्रवाई के बजाय, अंतरिम सरकार के दौर में चरमपंथी तत्व भारत को दोषी ठहराकर असली मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं।


🗳️ उस्मान हादी की हत्या: क्या है मामला?

  • कौन थे? 32 वर्षीय उस्मान हादी ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे और 2024 के आंदोलनों के दौरान राष्ट्रीय चर्चा में आए।
  • क्या हुआ? 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उनके सिर में गोली मारी गई। इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर ले जाया गया, जहां 18 दिसंबर को उनका निधन हो गया।
  • राजनीतिक संदर्भ: वे 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनाव के उम्मीदवार भी थे।
  • विवाद: कुछ कट्टरपंथी समूहों ने हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज करते हुए “दुष्प्रचार” बताया।

🤝 भारत-बांग्लादेश संबंधों पर हसीना की चेतावनी

शेख हसीना ने कहा कि भारत बांग्लादेश का “सबसे करीबी सहयोगी” है और दोनों देशों ने दशकों से व्यापार, कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम किया है। उनके मुताबिक, मौजूदा सरकार का विदेश नीति पर “अविवेकपूर्ण” रवैया न सिर्फ अदूरदर्शी बल्कि “अत्यंत खतरनाक” भी है, क्योंकि इससे आपसी विश्वास कमजोर पड़ता है।


🔎 भारत-विरोधी नैरेटिव क्यों गढ़ा जा रहा है?

  1. ध्यान भटकाने की रणनीति: आंतरिक अव्यवस्था, चुनावी हिंसा और कानून-व्यवस्था की विफलताओं से फोकस हटाना।
  2. कट्टरपंथी ध्रुवीकरण: समाज में ‘हम बनाम वे’ का भाव पैदा कर समर्थन जुटाना।
  3. विदेशी दुश्मन का फ्रेम: जटिल घरेलू समस्याओं को सरल ‘बाहरी साजिश’ में बदल देना।
  4. क्षेत्रीय राजनीति: भारत-विरोधी बयानबाज़ी से अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति और दबाव बनाने की कोशिश।

उस्मान हादी की हत्या एक गंभीर अपराध है, लेकिन शेख हसीना के मुताबिक इसे भारत से जोड़ना तथ्य-आधारित नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। यदि इस तरह का नैरेटिव बढ़ता रहा तो न सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक स्थिरता, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *