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तेजस्वी यादव के विधायकों को तोड़ने की तैयारी में BJP? राजनीतिक गलियारों में उठी भारी चर्चा…

बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव के डेढ़ महीने बाद एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। नीतीश सरकार में कृषि मंत्री और BJP नेताओं के बयानों ने RJD में संभावित टूट की अटकलों को हवा दे दी है। अब राजनैतिक गलियारों में तेजस्वी यादव के विधायकों के एनडीए संपर्क में होने की चर्चाएं तेज़ हैं।


तेजस्वी यादव “जीरो पर आउट”?

कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने RJD के भविष्य पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि तेजस्वी यादव अब कुछ भी नहीं बचा। उनके अनुसार चुनाव में हार के बाद पार्टी नेतृत्व की कमी और हताशा ने RJD विधायकों को कमजोर कर दिया है। रामकृपाल ने कहा, “तेजस्वी यादव की पार्टी खत्म हो चुकी है। उनके 25 में से सभी विधायक हमारी पार्टी से संपर्क में हैं।”


विदेश यात्रा पर सवाल

रामकृपाल यादव ने तेजस्वी यादव की हालिया विदेश यात्रा को लेकर भी तीखा रुख अपनाया। उनके अनुसार, चुनाव हार के बाद तेजस्वी यादव जनता के बीच जाने से बच रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यह कदम राजद में नेतृत्व की कमी और असंतोष को दर्शाता है


BJP प्रवक्ता का तंज

बीजेपी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि RJD विधायक नेतृत्व की कमी और मौजूदा अराजकता की वजह से हताश हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी RJD विधायक NDA के संपर्क में हैं और पार्टी में कभी भी बड़ी फूट पड़ सकती है। उनका कहना है कि वंशवाद और भाई-भतीजावाद की राजनीति ने पार्टी की साख कमजोर की है।


जदयू नेता की टिप्पणी

जदयू नेता मनीष यादव ने कहा कि तेजस्वी यादव ने चुनाव के समय नीतीश कुमार पर टिप्पणी की थी, लेकिन जनता ने उन्हें उनकी असली जगह दिखा दी। इसके चलते RJD के विधायक अब “डिप्रेशन” में हैं, क्योंकि उन्हें दिशा देने वाला कोई नहीं है।


राजद में असंतोष और संभावित टूट

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला RJD के लिए संघर्षपूर्ण समय की ओर इशारा करता है। असंतुष्ट विधायक एनडीए के पाले में जाने पर विचार कर सकते हैं, जिससे पार्टी में बड़ी फूट की संभावना बन सकती है। इससे बिहार की राजनीतिक तस्वीर आगामी महीनों में और जटिल हो सकती है।


राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनाव

विश्लेषकों का मानना है कि BJP और NDA का यह कदम RJD को कमजोर करने और विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। तेजस्वी यादव के लिए यह चुनौती है कि वे अपने विधायकों को संगठित करें और पार्टी की एकता बनाए रखें, नहीं तो आगामी राजनीतिक समीकरण उनके लिए और कठिन हो सकते हैं।

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