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‘कैदी नंबर 804’ कव्वाली गाने पर बवाल, इमरान खान के समर्थन में सुर उठाने वाले सिंगर पर FIR


पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थन की हर आवाज पर कार्रवाई तेज होती जा रही है। अब लाहौर में एक सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान इमरान खान से जुड़ा गीत गाने पर एक कव्वाल के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहस छेड़ दी है।


🎤 सांस्कृतिक कार्यक्रम में गूंजा ‘कैदी नंबर 804’

यह मामला 4 जनवरी का है, जब लाहौर के ऐतिहासिक शालीमार गार्डन में एक सरकारी सांस्कृतिक नाइट का आयोजन किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान कव्वाल फराज खान ने इमरान खान से जुड़ा ‘कैदी नंबर 804’ नामक गीत प्रस्तुत किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।


📄 गायक पर कार्यक्रम को राजनीतिक रंग देने का आरोप

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने कव्वाल फराज खान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जानबूझकर एक गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक आयोजन को राजनीतिक मंच में बदलने की कोशिश की। FIR में कहा गया है कि यह गीत जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान से जुड़ा था।


👮 शिकायतकर्ता कौन और क्या हैं आरोप

इस मामले में शिकायतकर्ता शालीमार गार्डन के प्रभारी जमीरुल हसन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वॉल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम पूरी तरह गैर-राजनीतिक था, लेकिन गायक ने इसका गलत इस्तेमाल किया।


⚠️ दर्शकों की मांग पर गाना, फिर भी कार्रवाई

शिकायत के अनुसार, गायक और उसके साथियों ने कुछ दर्शकों की मांग पर यह गीत गाया। हालांकि पुलिस को बताया गया कि कलाकार को यह समझना चाहिए था कि कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोग मौजूद थे और ऐसे गीत से तनाव फैल सकता था।


🚨 अशांति फैलने की आशंका जताई गई

शिकायतकर्ता ने FIR में यह भी कहा कि इस तरह के विवादास्पद गीत से मौके पर अशांति या हिंसा फैलने का खतरा था। इसी आधार पर गायक और उसके साथियों के खिलाफ कानून के तहत मामला दर्ज किया गया।


📊 इमरान समर्थकों पर बढ़ता शिकंजा

यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तान में इमरान खान और उनकी पार्टी से जुड़ी किसी भी अभिव्यक्ति को लेकर प्रशासन कितना सख्त रुख अपना रहा है। सरकार, पुलिस और सेना—तीनों पर यह आरोप लगातार लग रहे हैं कि इमरान समर्थकों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, चाहे वह राजनीतिक बयान हो या सांस्कृतिक प्रस्तुति।

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