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नए साल का तोहफा: अलवर संभाग के 1026 शिक्षकों का स्थायीकरण, वर्षों की प्रतीक्षा हुई खत्म….

नए साल की शुरुआत अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों के सैकड़ों शिक्षकों के लिए बड़ी राहत और खुशी लेकर आई है। दो वर्ष का प्रोविजन पीरियड पूरा कर चुके कुल 1026 शिक्षकों को आखिरकार स्थायी नियुक्ति का लाभ मिल गया है। लंबे समय से लंबित चल रहे इस मामले पर जिला स्थापना समिति की बैठक में अंतिम मुहर लगाई गई।


डीईसी बैठक में लिया गया अहम फैसला

जिला परिषद सभागार में आयोजित जिला स्थापना समिति (DEC) की बैठक में शिक्षकों के स्थायीकरण से जुड़े सभी लंबित मामलों की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान प्रोविजन पीरियड पूरा कर चुके शिक्षकों के प्रकरणों को एक-एक कर जांचा गया और नियमों के अनुरूप उन्हें स्थायी करने का अनुमोदन किया गया।


तीन महीने की देरी के बाद मिला न्याय

गौरतलब है कि अधिकांश शिक्षकों का प्रोविजन पीरियड करीब तीन महीने पहले ही पूरा हो चुका था। बावजूद इसके स्थायीकरण की प्रक्रिया लंबित थी। इस देरी को लेकर शिक्षक संगठनों और प्रभावित शिक्षकों ने कई बार जिला प्रमुख और जिला परिषद के सीईओ को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी और मांग जाहिर की थी।


जिलेवार आंकड़े, सबसे अधिक अलवर में शिक्षक स्थायी

जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर ने जानकारी देते हुए बताया कि स्थायीकरण किए गए शिक्षकों में

  • अलवर जिले से 564 शिक्षक,
  • खैरथल-तिजारा जिले से 325 शिक्षक,
  • कोटपूतली-बहरोड़ जिले से 137 शिक्षक शामिल हैं।

इन सभी शिक्षकों ने निर्धारित अवधि का सफलतापूर्वक कार्यकाल पूरा किया है और अब उन्हें सेवा सुरक्षा का लाभ मिलेगा।


लंबित औपचारिकताएं बनी थीं देरी की वजह

जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर ने बताया कि कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी नहीं हो पाई थीं, जिसके चलते स्थायीकरण में विलंब हुआ। अब सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं और शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार प्रदान किया गया है।


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शिक्षकों के लिए “नए साल का उपहार”

बलवीर छिल्लर ने शिक्षकों के स्थायीकरण को नए साल का तोहफा बताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया नियमों के तहत आवश्यक है और समय पर पूरी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की स्थिरता से शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बच्चों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।


स्थायीकरण से बढ़ेगा मनोबल और जिम्मेदारी

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी नियुक्ति मिलने से शिक्षकों का मनोबल बढ़ता है और वे अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हैं। लंबे समय से अस्थायी स्थिति में कार्यरत शिक्षकों को अब सेवा सुरक्षा, वेतन और अन्य लाभों में स्थायित्व मिलेगा।


आगे भी लंबित मामलों पर रहेगा फोकस

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आने वाली बैठकों में भी अन्य लंबित सेवा प्रकरणों की समीक्षा की जाएगी, ताकि कर्मचारियों और शिक्षकों को अनावश्यक रूप से इंतजार न करना पड़े।

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