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घने कोहरे में दर्दनाक हादसा: प्रयागराज एक्सप्रेस की चपेट में आईं 20 बकरियां, चरवाहे के परिवार पर टूटा आर्थिक संकट….

अलवर जिले के गोविन्दगढ़ कस्बे में सोमवार सुबह घने कोहरे ने एक गरीब परिवार की ज़िंदगी उजाड़ दी। रेलवे ट्रैक पर हुए इस दर्दनाक हादसे में प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से 20 बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गईं। यह हादसा न सिर्फ जानवरों की मौत का मामला है, बल्कि एक ऐसे परिवार की आजीविका छिनने की कहानी भी है, जो इन्हीं बकरियों पर निर्भर था।


कोहरे ने छीनी विजिबिलिटी, ट्रेन से हुआ भीषण टकराव

घटना सोमवार सुबह करीब 10:57 बजे की बताई जा रही है। उस समय गोविन्दगढ़ क्षेत्र में घना कोहरा छाया हुआ था, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई थी। रेलवे पुलिया नंबर LHS-68 के पास अचानक बकरियों का झुंड रेलवे ट्रैक पर पहुंच गया। इसी दौरान तेज रफ्तार से आ रही प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन वहां से गुज़री और बकरियां उसकी चपेट में आ गईं।


चराई के दौरान भटका झुंड, पलभर में उजड़ गई मेहनत

पीड़ित चरवाहा महेंद्र सैनी रोज़ की तरह अपनी बकरियों को बनखंडी मंदिर के पास खुले मैदान में चरा रहा था। कोहरे की वजह से बकरियों का झुंड दिशा भटक गया और अनजाने में रेलवे ट्रैक तक पहुंच गया। ट्रेन की रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक को ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिल सका और हादसा हो गया।


20 बकरियों की मौत, तीन घायल, परिवार सदमे में

हादसे में 20 बकरियों की कटकर मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन बकरियां गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटनास्थल पर खून और बिखरे अवशेष देखकर हर कोई सन्न रह गया। कुछ ही मिनटों में इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग मौके पर जमा हो गए।


बकरियां थीं रोज़ी-रोटी का एकमात्र सहारा

महेंद्र सैनी ने बताया कि यही बकरियां उनके परिवार की एकमात्र आजीविका थीं। बकरियों को बेचकर और दूध से होने वाली आमदनी से वह अपने बच्चों का पालन-पोषण करता था। इस हादसे ने उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। परिवार सदमे में है और भविष्य को लेकर चिंता साफ झलक रही है।


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पीड़ित ने प्रशासन से की मुआवज़े की मांग

हादसे के बाद पीड़ित चरवाहे ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और मुआवज़े की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मदद नहीं मिली, तो परिवार का गुजर-बसर करना मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की है।


रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा इंतज़ामों और चेतावनी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर पशु रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं, जिससे ऐसे हादसे होते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोहरे

के मौसम में अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय बेहद ज़रूरी हैं।


प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार

फिलहाल घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई और मुआवज़े के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं। यह हादसा एक गरीब परिवार की मेहनत और भरोसे के टूटने की दर्दनाक मिसाल बन गया है।

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