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⚔️ कंबोडिया-थाईलैंड में तोपें शांत, ट्रंप पहुंचे क्रेडिट लेने — अमेरिका को बताया ‘असली UN’

सीमा तनाव थमते ही कूटनीतिक पहल

कंबोडिया और थाईलैंड के बीच कई दिनों तक चली सीमा झड़पों के बाद हालात अब फिलहाल शांत हो गए हैं। इसी बीच कंबोडिया ने थाईलैंड को ‘त्वरित सीमा बैठक’ का प्रस्ताव भेजा है, ताकि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सके।

कंबोडिया के सीमा मामलों के राज्य सचिवालय ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि थाईलैंड को एक कूटनीतिक नोट भेजा गया है। इसमें प्रस्ताव रखा गया है कि जनवरी 2026 के पहले हफ्ते में सिएम रीप प्रांत में कंबोडिया–थाईलैंड संयुक्त सीमा आयोग की बैठक बुलाई जाए।

संयुक्त सर्वे और सीमांकन पर होगी चर्चा

कंबोडिया का कहना है कि इस बैठक का मकसद सीमा क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित करना और संयुक्त सर्वे व सीमांकन प्रक्रिया को फिर से शुरू करने पर चर्चा करना है। हालांकि, अब तक थाईलैंड की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सहमति सामने नहीं आई है

ट्रंप ने फिर लिया श्रेय

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर इस घटनाक्रम का श्रेय लेते नजर आए। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए लिखा—

“मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच शुरू हुई लड़ाई कुछ समय के लिए रुक जाएगी और वे हमारे हालिया वास्तविक समझौते के अनुसार शांति से रहेंगे।”

ट्रंप ने आगे दोनों देशों के नेताओं की तारीफ करते हुए कहा कि यह फैसला तेज, निर्णायक और बिल्कुल सही था — जैसा कि ऐसे मामलों में होना चाहिए।

अमेरिका बनाम संयुक्त राष्ट्र?

ट्रंप के इस बयान को कूटनीतिक हलकों में क्रेडिट लेने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि सीमा विवाद पर बातचीत की पहल कंबोडिया ने की है, जबकि अमेरिका की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इसके बावजूद ट्रंप बार-बार अमेरिका को वैश्विक विवादों में संयुक्त राष्ट्र से भी ज्यादा प्रभावी मध्यस्थ के रूप में पेश करते रहे हैं।

अब निगाहें थाईलैंड के जवाब पर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—

  • क्या थाईलैंड कंबोडिया के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा?
  • क्या जनवरी 2026 में संयुक्त सीमा बैठक हो पाएगी?
  • और क्या यह शांति स्थायी साबित होगी?

सीमा पर बंदूकों की खामोशी के बाद अब कूटनीति की अग्निपरीक्षा शुरू हो चुकी है।

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