राजस्थान से राज्यसभा के लिए पूनिया, अलका और डांगी निर्विरोध निर्वाचित
राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव बिना मतदान के ही पूरा हो गया। भारतीय जनता पार्टी के डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी को निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित घोषित किया गया। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में रहने से चुनाव की आवश्यकता नहीं रही। निर्वाचन अधिकारी ने तीनों को निर्वाचन प्रमाण पत्र भी सौंप दिए।
बिना मतदान तय हुआ राज्यसभा का परिणाम
राजस्थान में राज्यसभा की तीन रिक्त सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया था और मतदान 18 जून को प्रस्तावित था। हालांकि नामांकन वापसी की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट हो गया कि तीन सीटों के लिए केवल तीन वैध उम्मीदवार ही मैदान में हैं। किसी अन्य उम्मीदवार के नामांकन नहीं करने के कारण चुनाव निर्विरोध हो गया। इसके साथ ही मतदान की आवश्यकता समाप्त हो गई और निर्वाचन प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी कर ली गई।
बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार को मिली जीत
भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका सिंह गुर्जर को उम्मीदवार बनाया था। वहीं कांग्रेस ने नीरज डांगी को एक बार फिर राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा। विधानसभा में उपलब्ध संख्या बल को देखते हुए तीनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। आखिरकार किसी मुकाबले की स्थिति नहीं बनने पर तीनों प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए।
विधानसभा का संख्या बल बना आधार
राजस्थान विधानसभा की 200 सदस्यीय संरचना में राज्यसभा चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को निर्वाचित होने हेतु आवश्यक मतों का आंकड़ा 51 माना जाता है। वर्तमान में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत के साथ पर्याप्त विधायक हैं, जिससे वह दो सीटें आसानी से जीत सकती थी। दूसरी ओर कांग्रेस के पास एक सीट जीतने लायक संख्या बल मौजूद है। इसी गणित के चलते राज्यसभा चुनाव को लेकर किसी प्रकार की राजनीतिक अनिश्चितता नहीं थी।
निर्वाचन अधिकारी ने सौंपे प्रमाण पत्र
राज्यसभा निर्वाचन के रिटर्निंग ऑफिसर भारत भूषण शर्मा ने विधानसभा परिसर में आयोजित प्रक्रिया के दौरान तीनों निर्वाचित उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र सौंपे। इसके साथ ही राजस्थान से राज्यसभा की तीनों सीटों का प्रतिनिधित्व तय हो गया। निर्वाचित सदस्यों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य और देश के हितों से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने का भरोसा जताया।
राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
राज्यसभा में निर्वाचित होने के बाद तीनों नेता अब उच्च सदन में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने अनुभवी नेताओं को संसद भेजकर संगठनात्मक और राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास किया है। आगामी संसदीय सत्रों में इन नेताओं की भूमिका पर भी राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।