Alwar News: बुध विहार में लेपर्ड की आहट से हड़कंप, वन विभाग ने बताया- तेंदुआ नहीं बिल्ली थी
अलवर के बुध विहार सी-ब्लॉक में देर रात एक जानवर के घर के गेट के ऊपर से गुजरने का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पिछले दो दिनों से वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय ग्रुप्स में वायरल हो रहा था। लोग इसे तेंदुआ मानकर चिंतित थे। बुध विहार के पास सरिस्का टाइगर रिजर्व का बफर जोन होने से आशंका और बढ़ गई। हालांकि, वन विभाग की टीम ने वीडियो की जांच के बाद स्पष्ट किया कि फुटेज में दिखाई दे रहा जानवर तेंदुआ नहीं, बल्कि बिल्ली है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।
घर के गेट के ऊपर से गुजरता दिखा जानवर
बुध विहार के सी-ब्लॉक में सामने आए वीडियो में एक जानवर घर के गेट के ऊपर बनी संकरी जगह से गुजरता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे तेंदुए का फुटेज मान लिया।वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय व्हाट्सऐप ग्रुप्स में तेजी से प्रसारित हुआ। इसके बाद आसपास के लोगों में वन्यजीव को लेकर चिंता बढ़ गई।कई लोगों ने रात के समय घर से बाहर निकलने में भी सावधानी बरतनी शुरू कर दी।
सरिस्का बफर जोन से जुड़ा होने के कारण बढ़ी आशंका
बुध विहार के पास पहाड़ी क्षेत्र सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर जोन से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से इलाके में वन्यजीवों की मौजूदगी की आशंका स्थानीय लोगों के बीच बनी रहती है।वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इसे इसी संदर्भ में देखा। विजय नगर, बुध विहार, पत्रकार कॉलोनी और धोबी घट्टा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा फैल गई।हालांकि, वन विभाग की जांच के बाद वीडियो में तेंदुआ होने की आशंका खारिज कर दी गई।
वन विभाग ने वीडियो की बारीकी से जांच की
मामले की जानकारी मिलने के बाद सरिस्का की टीम ने वीडियो फुटेज की जांच की। टीम ने जानवर के आकार, चाल-ढाल और शरीर की बनावट को ध्यान से देखा।अलवर बफर जोन के रेंजर शंकर सिंह राजपूत ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहा जानवर तेंदुआ नहीं है।वन विभाग के अनुसार जानवर का आकार तेंदुए की तुलना में काफी छोटा दिखाई दे रहा है।
पूंछ की धारियों से हुई बिल्ली की पहचान
रेंजर शंकर सिंह राजपूत के अनुसार वीडियो में दिखाई दे रहे जानवर की पूंछ पर घेरेनुमा धारियां नजर आ रही हैं।उन्होंने बताया कि ऐसी धारियां घरेलू या सामान्य बिल्ली में दिखाई दे सकती हैं, जबकि तेंदुए की पूंछ की बनावट इससे अलग होती है।इसके अलावा जानवर का शरीर और चाल भी तेंदुए से मेल नहीं खाती। इन सभी पहलुओं को देखते हुए वन विभाग ने इसे बिल्ली बताया है।
गेट की संकरी जगह से निकलने पर भी सवाल
वन विभाग ने वीडियो में जानवर की गतिविधि का भी विश्लेषण किया। रेंजर के अनुसार जिस तरह जानवर घर के गेट के ऊपर बनी संकरी जगह से निकलता दिखाई दे रहा है, वह तेंदुए के आकार और गतिविधि से मेल नहीं खाता।इस आधार पर भी वीडियो में तेंदुआ होने की आशंका को खारिज किया गया।वन विभाग ने लोगों से बिना पुष्टि के किसी वीडियो को देखकर डरने या अफवाह फैलाने से बचने की अपील की है।
दो दिन तक सोशल मीडिया पर वायरल रहा वीडियो
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह वीडियो पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय ग्रुप्स में लगातार शेयर किया जा रहा था।वीडियो के साथ तेंदुआ होने का दावा किया गया। इससे इलाके में वन्यजीव को लेकर चिंता बढ़ती गई।वन विभाग की जांच के बाद अब स्थिति स्पष्ट हुई है कि वीडियो में तेंदुआ नहीं, बल्कि बिल्ली दिखाई दे रही है।
आसपास के इलाकों में भी बनी थी चिंता
वीडियो वायरल होने के बाद बुध विहार के अलावा विजय नगर, पत्रकार कॉलोनी और धोबी घट्टा क्षेत्र में भी लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई थी।स्थानीय लोगों का कहना था कि यदि वास्तव में तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्र में पहुंचा है तो सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी होगी।अब वन विभाग के स्पष्टीकरण के बाद लोगों की चिंता कम हुई है और क्षेत्र में सामान्य स्थिति लौटने की उम्मीद है।
वन विभाग की अपील- वीडियो की पुष्टि के बाद ही भरोसा करें
वन्यजीवों से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं। कई बार पुराने या गलत संदर्भ वाले वीडियो भी नए दावों के साथ साझा किए जाते हैं।बुध विहार की घटना में भी वीडियो देखकर लोगों ने इसे तेंदुआ मान लिया। लेकिन वन विभाग की जांच में जानवर की पहचान अलग सामने आई।ऐसे में स्थानीय लोगों के लिए जरूरी है कि वन्यजीव से जुड़ी किसी भी सूचना की पुष्टि संबंधित विभाग से करने के बाद ही उस पर भरोसा करें।
तेंदुआ नहीं, बिल्ली निकलने से मिली राहत
बुध विहार में जिस वीडियो ने दो दिनों तक लोगों को चिंता में रखा, वन विभाग की जांच के बाद उसकी तस्वीर साफ हो गई है।फुटेज में दिखाई दे रहा जानवर तेंदुआ नहीं बल्कि बिल्ली है। इसके बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है।हालांकि, सरिस्का बफर जोन से जुड़े क्षेत्रों में वन्यजीवों की वास्तविक मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण बनी रहेगी।