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राजस्थान का अगला CS कौन? वरिष्ठ IAS अफसरों की रेस तेज.

16 दिन बाकी, मुकाबला कड़ा: वी. श्रीनिवास से रजत मिश्रा तक पांच अधिकारी रेस में

राजस्थान में अगले मुख्य सचिव (सीएस) की नियुक्ति को लेकर मुकाबला निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मौजूदा सीएस सुधांश पंत के रिलीव होने में अब सिर्फ 16 दिन बचे हैं, ऐसे में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। दिल्ली के शक्तिशाली सर्किल से लेकर जयपुर प्रशासनिक गलियारों तक, हर तरफ नए सीएस के नाम को लेकर गहन चर्चाएं तेज हैं।

वरिष्ठता की दौड़ में वी. श्रीनिवास सबसे आगे

नई नियुक्ति को लेकर जिस नाम की चर्चा सबसे ज्यादा है, वह है 1989 बैच के वरिष्ठ आईएएस वी. श्रीनिवास का। केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने के कारण उन्हें ‘दिल्ली की गुड लॉबी’ का मजबूत समर्थन माना जा रहा है। हालांकि उनकी सेवानिवृत्ति 2026 में होने वाली है, जो चयन प्रक्रिया में एक संवेदनशील फैक्टर बनकर सामने आ सकती है।

तन्मय कुमार भी दिल्ली के सर्किल में सक्रिय

1993 बैच के तन्मय कुमार भी इस रेस के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। उनकी कार्यशैली और केंद्रीय अनुभव उन्हें दिल्ली की पसंद के रूप में स्थापित करता है। सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में वह दिल्ली के कई प्रभावी निर्णय-निर्माताओं के संपर्क में सक्रिय रूप से दिखे हैं।

रजत मिश्रा की बढ़त: लंबा कार्यकाल मजबूत पक्ष

1992 बैच के रजत कुमार मिश्रा को भी मजबूत विकल्प माना जा रहा है। उनका कार्यकाल जनवरी 2028 तक है, जो उन्हें प्रशासनिक स्थिरता के लिहाज से अत्यधिक सुविधाजनक उम्मीदवार बनाता है। वे पहले भी राजस्थान सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, जिससे उनकी वापसी की चर्चाएं और तेज हो चुकी हैं।

स्थानीय दावेदार भी मैदान में—अभय और अखिल की स्थिति मजबूत

राजस्थान कैडर में दो और नाम प्रमुख रूप से उभरते हैं—अखिल अरोड़ा और अभय कुमार। दोनों अधिकारियों ने गहलोत और वसुंधरा राजे सरकारों में अहम जिम्मेदारियाँ संभाली हैं। खासतौर पर अखिल अरोड़ा की प्रशासनिक पकड़ और अभय कुमार की शांत कार्यशैली उन्हें स्थानीय स्तर पर मजबूत दावेदार बनाती है।

निर्णय पर कई कारक भारी—वरिष्ठता से लेकर दिल्ली का समीकरण

सूत्रों का मानना है कि नए सीएस के नाम का चयन सिर्फ वरिष्ठता पर आधारित नहीं होगा।
कार्यकाल, दिल्ली के साथ तालमेल, केंद्र-राज्य समीकरण, और भविष्य की प्रशासनिक जरूरतें—ये सभी फैक्टर मिलकर अंतिम निर्णय तय करेंगे।

राजस्थान प्रशासन में आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव तय है। पांच दावेदार और कई समीकरण—यह मुकाबला अब बेहद दिलचस्प हो चुका है। फैसला चाहे जिसे मिले, लेकिन नए मुख्य सचिव की नियुक्ति प्रदेश की आगामी प्रशासनिक दिशा को गहराई से प्रभावित करेगी।

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