🚀 व्हीलचेयर पर बैठकर की अंतरिक्ष की सैर, जर्मन महिला इंजीनियर ने रचा इतिहास
stvnewsonline@gmail.com / 4 months
December 21, 2025
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✨ जानें क्यों खास है मिकाएला बेंथाउस की ये उड़ान
ख्वाहिशों की कोई सीमा नहीं होती—और यह बात जर्मनी की इंजीनियर मिकाएला बेंथाउस ने पूरी दुनिया को दिखा दी। व्हीलचेयर पर जीवन बिताने वाली मिकाएला ने अंतरिक्ष की सैर कर इतिहास रच दिया। वह व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाली पहली इंसान बन गईं, जिन्होंने अंतरिक्ष तक पहुंच बनाई। यह सिर्फ एक स्पेस ट्रिप नहीं, बल्कि हौसले, समावेशन और उम्मीद की उड़ान थी।
🌌 कैसे बनीं इतिहास का हिस्सा?
अमेरिकी अरबपति जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड रॉकेट (NS-37) से मिकाएला ने यह ऐतिहासिक यात्रा की।
रॉकेट ने वेस्ट टेक्सास से सुबह 8:15 बजे (स्थानीय समय) उड़ान भरी
यान करीब 100 किलोमीटर (62 मील) की ऊंचाई तक पहुंचा
उड़ान की कुल अवधि रही करीब 11 मिनट
यात्रियों ने कुछ क्षणों तक ज़ीरो ग्रैविटी का अनुभव किया
यह ब्लू ओरिजिन की 16वीं क्रूड फ्लाइट थी।
👩🚀 कौन हैं मिकाएला बेंथाउस?
उम्र: 33 साल
पेशा: यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) में इंजीनियर
स्थिति: पैराप्लेजिया (रीढ़ की चोट के कारण व्हीलचेयर पर निर्भर)
मिकाएला ने बताया कि 26 साल की उम्र में माउंटेन बाइकिंग के दौरान एक हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी को गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद जिंदगी पूरी तरह बदल गई, लेकिन उनके सपने नहीं बदले।
💬 अंतरिक्ष से लौटकर क्या बोलीं मिकाएला?
उड़ान के बाद मिकाएला ने कहा—
“यह मेरे जीवन का सबसे शानदार अनुभव था। कभी भी अपने सपनों को मत छोड़ो। कई बार संभावना बहुत कम होती है, लेकिन कोशिश करना जरूरी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें एहसास हुआ कि दुनिया आज भी दिव्यांगजनों के लिए पूरी तरह सुलभ नहीं है।
“हमें एक ऐसा समाज बनाना होगा, जो हर किसी के लिए एक्सेसिबल हो।”
🛰️ मिशन में कौन-कौन थे शामिल?
इस उड़ान में कुल 6 यात्री शामिल थे—
मिकाएला बेंथाउस
पूर्व स्पेस इंजीनियर हांस कोनिग्समैन
चार अमेरिकी उद्यमी
KODAK Digital Still Camera
🌍 ब्लू ओरिजिन का बड़ा लक्ष्य
ब्लू ओरिजिन अब तक कई मशहूर लोगों को अंतरिक्ष की सैर करा चुका है—
पॉप सिंगर कैटी पेरी
‘स्टार ट्रेक’ के अभिनेता विलियम शैटनर
कंपनी का लक्ष्य है:
स्पेस टूरिज्म को आम लोगों तक पहुंचाना
भविष्य में स्पेसएक्स जैसी कंपनियों को कड़ी चुनौती देना
✔ पहली बार किसी पैराप्लेजिक व्यक्ति ने अंतरिक्ष की यात्रा की ✔ तकनीक के साथ-साथ इंक्लूसिविटी की मिसाल ✔ दिव्यांगजनों के लिए नई संभावनाओं का रास्ता ✔ यह साबित किया कि सीमाएं शरीर की नहीं, सोच की होती हैं
मिकाएला बेंथाउस की उड़ान सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि—
अगर हौसला मजबूत हो, तो व्हीलचेयर भी रॉकेट बन सकती है।