विश्वनाथन आनंद ने JLF में बताया—मां से हारना देता है असली खुशी
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) में शतरंज के जादूगर और पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने सिर्फ चेस की दुनिया ही नहीं, बल्कि जीवन, भावनाओं और AI पर भी अपनी बेबाक राय साझा की। मंच पर आनंद ने मां के साथ अपने अनोखे रिश्ते का भी खुलासा किया।
1. मां के साथ हारना भी है खुशी
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी कब मिली—चैंपियनशिप जीतने पर या नागरिक सम्मान मिलने पर—तो आनंद ने बड़ी सादगी से कहा कि खुशियों की तुलना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि आज भी वे मां के साथ ताश खेलते हैं और अक्सर उनसे हार जाते हैं। “मां के सामने हारना मुझे सबसे ज्यादा खुश करता है,” आनंद ने भावुक होकर कहा।
यह कहानी दिखाती है कि असली जीत केवल खिताब या पदक में नहीं, बल्कि अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए छोटे-छोटे पलों में होती है।
2. याददाश्त के लिए कलम उठाना जरूरी
AI और डिजिटल गैजेट्स पर बात करते हुए आनंद ने कहा कि आज के समय में हम हर काम के लिए गैजेट्स पर निर्भर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ये हमेशा प्रभावी नहीं होते। इसलिए जरूरी चीजें हाथ से लिखना बेहतर है, क्योंकि लिखने से दिमाग उसे बेहतर तरीके से याद रख सकता है।
डिजिटल युग में मानव मस्तिष्क की क्षमता को सक्रिय बनाए रखने के लिए आनंद ने पुरानी परंपरा—लेखन—का महत्व बताया।
3. हार और भावनाओं पर काबू पाना
शतरंज की दुनिया की बात करते हुए आनंद ने कहा कि हारने पर गुस्सा आना स्वाभाविक है। लेकिन असली खिलाड़ी वही है जो इन भावनाओं को नियंत्रित करके अगले मूव पर ध्यान केंद्रित करता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि 2007 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने कैसे प्रयोग करते हुए अपनी चाल बदली और विरोधी को चौंकाया।
आनंद का यह अनुभव बताता है कि जोखिम लेना और प्रयोग करना सफलता की कुंजी है—चाहे खेल हो या जीवन।
4. AI के युग में ‘नई चाल’ खोजना चुनौती नहीं
आधुनिक शतरंज में AI की भूमिका पर आनंद ने कहा कि अब नई चालें ढूंढना मुश्किल नहीं है, बल्कि AI के सुझाए गए विकल्पों को समझना और उसका सही प्रयोग करना चुनौती है। उन्होंने चेतावनी दी कि संभलकर प्रयोग न किया जाए तो यह मस्तिष्क की ग्रोथ रोक सकता है।
AI के साथ समझदारी से खेलने और प्रयोग करने की सलाह सिर्फ शतरंज के लिए नहीं, बल्कि जीवन और सीखने की प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण है।