विनोद मेहरा: मासूम चेहरा, संवेदनशील अभिनय
हिंदी सिनेमा के सहायक और रोमांटिक अभिनेता Vinod Mehra ने अपने सहज और भावुक अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। 13 फरवरी 1945 को अमृतसर में जन्मे विनोद ने 13 साल की उम्र में फिल्म रागिनी में किशोर कुमार के बचपन का किरदार निभाकर डेब्यू किया।
पर्दे पर अलग पहचान
60 और 70 के दशक में जब Rajesh Khanna और Dharmendra जैसी हस्तियां चमक रही थीं, विनोद मेहरा ने शांत, सौम्य और चॉकलेटी इमेज के साथ अपनी जगह बनाई। उन्होंने अभिनय को दिखावे से दूर रखते हुए किरदार को जीया। उनकी आंखों की नमी, संवाद अदायगी और सरल अंदाज उन्हें अलग बनाते थे।
प्रमुख फिल्में और भूमिकाएँ
विनोद ज्यादातर सहायक या रोमांटिक भूमिकाओं में नजर आए। उनकी कुछ बेमिसाल फिल्में हैं:
- अनुराग
- अमर प्रेम
- घर
- बेमिसाल
- लाल पत्थर
- स्वीकार किया मैंने
- कर्तव्य
फिल्म लाल पत्थर में उन्होंने शेखर नाम के ईमानदार और भावुक युवक का किरदार निभाया। रेखा, मौशमी चटर्जी और बिंदिया गोस्वामी जैसी हीरोइनों के साथ उनकी केमिस्ट्री दर्शकों को पसंद आई।
45 की उम्र में निधन और निर्देशन
विनोद मेहरा ने गुरुदेव फिल्म का निर्देशन और प्रोडक्शन भी किया, जिसमें Sridevi, Rishi Kapoor और Anil Kapoor मुख्य भूमिकाओं में थे। 30 अक्टूबर 1990 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन 45 साल की उम्र में हो गया। गुरुदेव उनकी मौत के बाद 1993 में रिलीज हुई।
निजी जीवन और शादी की चर्चा
विनोद मेहरा की पर्सनल लाइफ भी सुर्खियों में रही। उन्होंने अपनी जिंदगी में तीन शादी कीं – मीना ब्रोका, बिंदिया गोस्वामी और किरण मेहरा। चौथी शादी को लेकर अभिनेत्री Rekha के साथ अफवाहें चलीं। यासिर उस्मान की किताब Rekha: The Untold Story में इस रिश्ते का ज़िक्र है। दोनों ने 1970 के दशक में कोलकाता में चुपके से शादी की थी, लेकिन पारिवारिक विरोध के कारण यह रिश्ता ज्यादा दिन टिक नहीं पाया।
सहज अभिनय और यादगार फिल्में
विनोद मेहरा ने हिंदी सिनेमा में दिखावे से दूर, संवेदनशील और स्वाभाविक अभिनय का नया पैमाना सेट किया। उनकी कुछ फिल्मों और सहज अभिनय की वजह से उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा।