“वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर विवाद, बंद होने की अटकलें तेज”
जम्मू-कश्मीर में नया शुरू हुआ श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस राजनीतिक और धार्मिक विवादों के बीच घिर गया है। आरोप यह हैं कि कॉलेज में मुस्लिम छात्रों को सीटें दिए जाने और श्राइन बोर्ड द्वारा आधुनिक शिक्षा संस्थान चलाने पर सवाल उठने के बाद सरकार इसे जल्द ही बंद करने का फैसला ले सकती है। भाजपा नेताओं की ओर से श्राइन बोर्ड की भूमिका पर आपत्ति जताए जाने के बाद मामला और गरमाया है। अब केंद्र तक यह मुद्दा पहुंच चुका है, जिससे कॉलेज के भविष्य पर गंभीर संशय पैदा हो गया है।
क्या पहले सत्र के बाद ही बंद हो जाएगा कॉलेज?
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस का पहला सत्र शुरू होते ही इस बात की चर्चाएं तेज हैं कि यह संस्थान आगे नहीं चलेगा। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) यहां दाखिला पाने वाले छात्रों को दूसरे मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरण देने पर विचार कर सकता है। इससे कॉलेज को स्थायी रूप से बंद किए जाने की अटकलें और प्रबल हुई हैं।
भाजपा की आपत्ति | श्राइन बोर्ड को आधुनिक शिक्षा से दूर रहने की सलाह
नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि श्राइन बोर्ड को आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए। भाजपा नेता सुनील शर्मा ने कहा कि हिंदुओं के चढ़ावे का इस्तेमाल धर्म, संस्कृति और सभ्यता को मजबूत करने में होना चाहिए, न कि मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान चलाने में।
श्राइन बोर्ड पर निशाना | संघर्ष समिति पहले से करती रही विरोध
वैष्णो देवी संघर्ष समिति लंबे समय से श्राइन बोर्ड द्वारा मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने का विरोध करती रही है। समिति का तर्क है कि बोर्ड का दायित्व तीर्थ प्रबंधन और सनातन संस्कृति को बढ़ावा देना है, न कि विश्वविद्यालय और कॉलेज खोलना। अब भाजपा के समर्थन के बाद यह विरोध और मजबूत हो गया है।
केंद्र सरकार पर दबाव | NMC को छात्रों के एडजस्टमेंट का सुझाव
जानकारी के अनुसार, भाजपा नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दे के बाद केंद्र सरकार जल्द ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से इस विषय पर चर्चा कर सकती है। संभावना जताई जा रही है कि नेशनल मेडिकल काउंसिल को कॉलेज में दाखिला पाए छात्रों को अन्य कॉलेजों में एडजस्ट करने के लिए कहा जा सकता है, ताकि विवाद से बचा जा सके।
धार्मिक पक्ष की प्रतिक्रिया | “श्राइन बोर्ड का काम यूनिवर्सिटी चलाना नहीं”
महामंडलेश्वर रामेश्वर दास महाराज ने दोहराया कि वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का उद्देश्य सनातन संस्कृति को सशक्त करना है, न कि आधुनिक शिक्षण संस्थान चलाना। उन्होंने कहा:
“अगर शिक्षा देनी है तो गरीब हिंदू बच्चों को मुफ्त में दें। यहां गुरुकुल बने, जहां बच्चे संस्कृति, भाषा और सभ्यता का ज्ञान ले सकें।”
उनके बयान के बाद विवाद और तीखा हो गया है।
विवाद की जड़ | मुस्लिम छात्रों को सीटें देने पर उठा मुद्दा
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कॉलेज में अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम छात्रों को सीटें मिलने पर भी कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई है। इसी विवाद ने राजनीतिक मोड़ लिया और श्राइन बोर्ड की भूमिका पर सीधा सवाल खड़ा हो गया।
आगे क्या? | कॉलेज का भविष्य अधर में
हालांकि श्राइन बोर्ड या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, पर राजनीतिक दबाव और बढ़ते विरोध को देखते हुए कॉलेज का भविष्य अस्थाई रूप से ही सही, लेकिन अनिश्चित दिखाई दे रहा है।
वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज एक धार्मिक संस्था द्वारा संचालित आधुनिक शिक्षा मॉडल पर खड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। धर्म, राजनीति और प्रशासन—तीनों के टकराव के बीच यह संस्थान अपने पहले ही सत्र में अस्तित्व के संकट से गुजर रहा है।