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समंदर में अमेरिका का ‘मिशन धुरंधर’: दो हफ्ते की निगरानी के बाद रूसी झंडा लगे टैंकर पर कब्ज़ा


अटलांटिक महासागर में अमेरिका ने एक हाई-प्रोफाइल समुद्री ऑपरेशन को अंजाम देते हुए रूसी झंडा लगे तेल टैंकर को जब्त कर लिया। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई से पहले जहाज पर दो सप्ताह से अधिक समय तक निगरानी रखी गई थी। हेलीकॉप्टरों और सैन्य विमानों की तैनाती के साथ की गई इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


🔹 गुप्त निगरानी से सीधा एक्शन

दो हफ्ते तक पीछा, फिर अटलांटिक में कार्रवाई

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस टैंकर पर लंबे समय से नज़र रखी जा रही थी। जहाज के ऊपर लगातार हेलीकॉप्टर मंडराते देखे गए और आइसलैंड स्थित अमेरिकी बेस से उड़ान भरने वाले विमान भी निगरानी में शामिल थे। आखिरकार, अटलांटिक महासागर में ऑपरेशन को अंजाम देकर टैंकर को अपने नियंत्रण में ले लिया गया।


🔹 रूसी मीडिया का वीडियो

हेलीकॉप्टर के साथ बोर्डिंग की कोशिश का दावा

रूसी सरकारी प्रसारक RT ने इस कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो और तस्वीरें जारी की हैं। फुटेज में एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर टैंकर के बेहद करीब उड़ता दिखाई देता है। मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि सेना जहाज पर चढ़ने (बोर्डिंग) की कोशिश कर रही थी, जो बाद में सफल ऑपरेशन में बदल गई।


🔹 कौन सा जहाज था निशाने पर?

‘मैरिनेरा’ टैंकर की यात्रा और अचानक बदला रास्ता

जब्त किए गए टैंकर का नाम मैरिनेरा बताया गया है। यह जहाज ईरान से वेनेज़ुएला की ओर जा रहा था। हालांकि, वेनेज़ुएला के जलक्षेत्र के पास चल रही अमेरिकी नाकाबंदी और प्रतिबंधों से बचने की कोशिश में कथित तौर पर इसने अपना मार्ग बदल लिया और अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ गया। इसी दौरान अमेरिका ने इसे घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया।


🔹 पहले से कड़ी निगरानी

हेलीकॉप्टर और सैन्य विमान लगातार कर रहे थे ट्रैक

अमेरिकी कार्रवाई से पहले जहाज पर सघन निगरानी की जा रही थी। कई बार टैंकर के ऊपर हेलीकॉप्टर उड़ते देखे गए। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में आइसलैंड में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने से जुड़े विमान भी शामिल थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि जहाज पर विशेष नजर रखी जा रही है।


🔹 यह पहली बार नहीं

पिछले साल भी विफल हुई थी बोर्डिंग की कोशिश

मैरिनेरा पहले भी अमेरिकी कार्रवाई के घेरे में आ चुका है। पिछले साल दिसंबर में वेनेज़ुएला के पास इस टैंकर पर चढ़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय चालक दल ने कथित तौर पर प्रयास को नाकाम कर दिया था। उस घटना के बाद जहाज पर रूसी झंडा फहराया गया और इसे रूस की आधिकारिक शिपिंग रजिस्ट्री में दर्ज कर दिया गया।


🔹 मॉस्को की आपत्ति

अमेरिकी निगरानी पर रूस ने जताया था विरोध

पहले प्रयास के बाद रूस ने अमेरिका के खिलाफ औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज कराया था और वाशिंगटन से जहाज का पीछा बंद करने की मांग की थी। मॉस्को का आरोप था कि अमेरिकी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन है। अब ताजा ऑपरेशन के बाद यह विवाद फिर से तेज होने की संभावना है।


समुद्र में प्रतिबंधों की सख्ती और बढ़ता भू-राजनीतिक टकराव

अटलांटिक में मैरिनेरा पर की गई कार्रवाई सिर्फ एक जहाज की जब्ती नहीं, बल्कि प्रतिबंधों के सख्त क्रियान्वयन और वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है। ईरान–वेनेज़ुएला मार्ग, रूसी झंडा और अमेरिकी नाकाबंदी—तीनों का मिलना इस ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय राजनीति का संवेदनशील मामला बनाता है।
यदि अमेरिका ऐसे अभियानों को और तेज करता है, तो यह समुद्री व्यापार मार्गों, ऊर्जा आपूर्ति और रूस-अमेरिका संबंधों पर दूरगामी असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मॉस्को इस कार्रवाई पर कूटनीतिक या रणनीतिक स्तर पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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