#देश दुनिया #पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

ईरान–अमेरिका टकराव की आहट, मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

अमेरिकी कार्रवाई की आशंका के बीच ईरान की बड़ी सैन्य तैयारी

अमेरिकी हमले की संभावनाओं के बीच ईरान ने 2000 से अधिक उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात कर दी हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया क्षेत्रीय संघर्षों के बावजूद ईरान का मिसाइल भंडार अभी भी काफी मजबूत बना हुआ है।

पिछले युद्ध के बाद भी ईरान की मारक क्षमता बरकरार

रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते साल जून में 12 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान इजरायल ने ईरान के बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया था। इसके बावजूद ईरान के पास इतनी मिसाइलें मौजूद हैं कि वह इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर फिर से बड़े हमले की क्षमता रखता है।

अमेरिकी ठिकानों पर सीधा खतरा

अनुमानों के अनुसार ईरान के पास करीब 2000 मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनसे वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना सकता है। इसके अलावा कम दूरी की मिसाइलों से खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसैनिक गतिविधियों को बाधित करने की क्षमता भी ईरान के पास है।

समुद्र में अमेरिकी नौसेना के लिए चुनौती

ईरान के पास एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें, टॉरपीडो बोट्स और ड्रोन का बड़ा जखीरा है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि किसी टकराव की स्थिति में अमेरिकी नौसेना को इन असममित हथियारों से गंभीर चुनौती मिल सकती है, खासतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा को लेकर।

लॉन्चरों की कमी ईरान की कमजोरी

हालांकि ईरान के लिए सबसे बड़ी चुनौती मिसाइल लॉन्चरों की कमी मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले संघर्ष में उसके कई लॉन्चर नष्ट हुए थे, जिससे एक साथ बड़े पैमाने पर हमले करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

क्या अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर निशाने पर?

पिछले युद्ध में ईरान ने सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनमें से कुछ इजरायल की धरती तक पहुंचीं। अब सवाल उठ रहा है कि अगर संघर्ष अमेरिका तक बढ़ता है, तो क्या ईरान अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे उच्च-मूल्य वाले लक्ष्यों को नुकसान पहुंचा पाएगा।

ट्रंप की रणनीति: सत्ता परिवर्तन की तैयारी?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सूत्रों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए हालात बनाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि सैन्य दबाव के जरिए आंतरिक विरोध को हवा दी जाए।

इजरायल से भी मिल रहे संकेत

इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर करीबी समन्वय है। सूत्रों के अनुसार, किसी बड़े कदम में ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था को कमजोर करना एक प्रमुख लक्ष्य हो सकता है।

मध्यस्थता की कोशिशें, लेकिन नतीजा शून्य

तुर्की, ओमान और कतर जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस समझौते के संकेत नहीं मिले हैं और बातचीत की राह मुश्किल नजर आ रही है।

ईरान के सामने रखी गई तीन बड़ी शर्तें

अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार ईरान से तीन प्रमुख मांगें की गई हैं—यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को समर्थन खत्म करना। इन मांगों पर तेहरान की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


ईरान-अमेरिका टकराव अब केवल कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं दिखता। मिसाइल तैनाती, सैन्य बयानबाज़ी और सत्ता परिवर्तन के संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मिडिल ईस्ट एक और बड़े संघर्ष के मुहाने पर खड़ा हो सकता है। अगर बातचीत विफल रहती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय देशों तक नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *