ट्रंप प्रशासन की ‘थर्ड कंट्री डिपोर्टेशन’ नीति पर अमेरिकी कोर्ट की रोक, जज बोले—गैरकानूनी है फैसला
अमेरिका की आव्रजन नीति को बड़ा झटका देते हुए एक संघीय अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump प्रशासन की विवादित “तीसरे देश में निर्वासन” नीति को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने कहा कि प्रवासियों को बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के किसी तीसरे देश भेजना अमेरिकी संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
🔹 क्या है ‘तीसरे देश डिपोर्टेशन’ नीति?
ट्रंप प्रशासन की इस नीति के तहत उन प्रवासियों को उनके मूल देश के बजाय किसी तीसरे देश में भेजा जा सकता था, जहां से उनका सीधा संबंध भी नहीं होता।
सरकार का तर्क था कि इससे अवैध प्रवासन पर नियंत्रण होगा, जबकि मानवाधिकार समूह इसे शरणार्थी सुरक्षा के खिलाफ मानते रहे हैं।
🔹 संघीय जज का बड़ा फैसला
मैसाचुसेट्स के अमेरिकी जिला न्यायाधीश Brian E. Murphy ने कहा कि यह नीति प्रवासियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
उन्होंने अपने आदेश को 15 दिनों के लिए स्थगित किया ताकि सरकार अपील कर सके।
यह संकेत है कि मामला अब फिर उच्च अदालतों—संभवतः Supreme Court of the United States—तक पहुंच सकता है।
🔹 प्रवासियों को ‘उचित प्रक्रिया’ का अधिकार
जज मर्फी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को तीसरे देश भेजने से पहले:
- स्पष्ट सूचना देना जरूरी है
- कानूनी आपत्ति दर्ज करने का अवसर मिलना चाहिए
उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति लोगों को चुनौती देने का मौका मिलने से पहले ही निर्वासित कर देती है।
यह फैसला अमेरिका में “ड्यू प्रोसेस” यानी न्यायिक प्रक्रिया के अधिकार को दोबारा केंद्र में लाता है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट पहले दे चुका था राहत
पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत ने प्रशासन को तीसरे देशों में तुरंत निर्वासन की अनुमति दी थी। हालांकि उदारवादी जज Sonia Sotomayor और Ketanji Brown Jackson ने इस फैसले पर असहमति जताई थी।
अब निचली अदालत का यह फैसला अमेरिकी न्याय व्यवस्था में नई संवैधानिक बहस को जन्म दे सकता है।
🔹 अदालत की ट्रंप प्रशासन पर सख्त टिप्पणी
जज मर्फी ने कहा कि प्रशासन ने कई मौकों पर अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया। आरोप है कि कुछ प्रवासियों को बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाए El Salvador और Mexico भेज दिया गया था।
यह टिप्पणी भविष्य में प्रशासनिक अधिकार बनाम न्यायिक निगरानी की बहस को और तेज कर सकती है।
🔹 दक्षिण सूडान निर्वासन विवाद
मामले में यह भी सामने आया कि कुछ प्रवासियों को युद्धग्रस्त South Sudan भेजा गया, जबकि उनका उस देश से कोई सीधा संबंध नहीं था।
सरकार का दावा था कि ये लोग अमेरिका में अपराधों के दोषी थे और उनके खिलाफ अंतिम निष्कासन आदेश जारी थे।
मानवाधिकार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा—यही इस केस का केंद्रीय टकराव बन गया है।
🔹 जज की नियुक्ति और राजनीतिक बहस
न्यायाधीश मर्फी को डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति Joe Biden ने नामित किया था, जिससे यह फैसला अमेरिकी राजनीति में भी बहस का मुद्दा बन गया है।
इमिग्रेशन नीति अमेरिका में चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बनी हुई है और यह फैसला आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकता है।
🔹 आगे क्या होगा?
संभावित अगले कदम:
- सरकार द्वारा अपील
- सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई
- डिपोर्टेशन नीति में संशोधन
यह मामला तय करेगा कि अमेरिका सुरक्षा प्राथमिकता देगा या शरणार्थी अधिकारों की कानूनी सुरक्षा को मजबूत करेगा।