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यूपी बजट 2026: चुनावी साल में भी ‘निर्माण’ पर दांव, लोकलुभावन वादों से दूरी

चुनावी बजट की परंपरा से अलग रुख

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। आमतौर पर चुनाव से पहले सरकारें लोकलुभावन घोषणाओं और मुफ्त योजनाओं की झड़ी लगा देती हैं, लेकिन इस बजट में ऐसी घोषणाओं से काफी हद तक परहेज किया गया है।
लड़कियों को स्कूटी देने जैसी सीमित घोषणाओं को छोड़ दें तो बजट का मुख्य फोकस दीर्घकालिक आर्थिक आधार को मजबूत करना है।

‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी आर्थिक छवि बदलने का प्रयास किया है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल अवसंरचना के विस्तार ने राज्य को निवेश मानचित्र पर नई पहचान दी है।
राज्य आज देश के कुल मोबाइल फोन उत्पादन का लगभग 65% हिस्सा तैयार कर रहा है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट इकाइयों का बड़ा हिस्सा भी यहीं स्थित है। इन उपलब्धियों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने के लिए बजट में पूंजी निवेश पर जोर स्पष्ट दिखता है।

पूंजीगत व्यय पर बड़ा दांव

बजट 2026-27 में पूंजीगत व्यय के लिए करीब 2,48,225.81 करोड़ रुपये (लगभग 19.5%) का प्रावधान किया गया है।
यह संकेत देता है कि सरकार ‘खर्च करने’ के बजाय ‘संपत्ति निर्माण’ को प्राथमिकता दे रही है। सड़क और पुलों के लिए 34,468 करोड़ रुपये का आवंटन लॉजिस्टिक लागत घटाने और निजी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डिजिटल और नई अर्थव्यवस्था पर फोकस

आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए 2,059 करोड़ रुपये तथा एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
राज्य में 30,000 करोड़ रुपये के संभावित निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने की योजना उत्तर प्रदेश को डिजिटल हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा ताकि विकास कुछ इलाकों तक सीमित न रहे।

‘फ्रीबी मॉडल’ से अलग आर्थिक दृष्टिकोण

यह बजट उन राज्यों से अलग छवि पेश करता है जहां चुनावी लाभ के लिए मुफ्त योजनाओं को प्राथमिकता दी जाती है। योगी सरकार का संदेश है कि अल्पकालिक लोकप्रियता के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती पर ध्यान दिया जाए।
यह दृष्टिकोण पूंजीगत निवेश आधारित मॉडल की ओर इशारा करता है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक विकास और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी जाती है।

असली परीक्षा क्रियान्वयन की

किसी भी बजट की सफलता उसकी घोषणाओं से नहीं, बल्कि क्रियान्वयन से तय होती है। पूंजीगत परियोजनाओं का वास्तविक लाभ वर्षों बाद दिखता है।
यदि सड़क, ऊर्जा, डिजिटल नेटवर्क और औद्योगिक परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो उत्तर प्रदेश एक मजबूत ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजन’ के रूप में उभर सकता है।
चुनौती यही है कि निवेश का यह रोडमैप जमीन पर उतरे और राज्य की अर्थव्यवस्था को टिकाऊ गति दे सके।

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