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उदयपुर में 30 करोड़ की महाधोखाधड़ी: विक्रम भट्ट और पत्नी श्वेतांबरी 7 दिन की पुलिस रिमांड पर

“30 करोड़ की ठगी का बड़ा खुलासा… उदयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई”**

उदयपुर में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। शहर में निवेश के नाम पर लोगों को फंसाने के आरोप में पुलिस ने मुख्य आरोपी विक्रम भट्ट और उसकी पत्नी श्वेतांबरी को गिरफ्तार कर अब सात दिन की रिमांड पर ले लिया है। पुलिस का दावा है कि शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाली वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

निवेश के नाम पर 30 करोड़ की ठगी, पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई”**

उदयपुर पुलिस ने करोड़ों की धोखाधड़ी के मामले में तेज़ी दिखाते हुए विक्रम भट्ट और उसकी पत्नी श्वेतांबरी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दंपति ने निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर कई लोगों से लगभग 30 करोड़ रुपये वसूल लिए। पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है और पुलिस के पास लगातार शिकायतें पहुंच रही हैं।

“कोर्ट का सख्त रुख: दोनों आरोपी 7 दिन की रिमांड पर”**

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दोनों आरोपियों को सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने के आदेश दिए। रिमांड अवधि में पुलिस को यह पता लगाने पर जोर है कि इतनी बड़ी रकम कहां निवेश की गई, किन खातों में ट्रांसफर हुई और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंकिंग दस्तावेज़ और फर्जी कंपनियों के रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है।

“फर्जी योजनाओं के जरिए बनाया गया जाल, कई राज्यों तक कनेक्शन की आशंका”**

जांच में सामने आ रहा है कि दंपति ने निवेशकों को जल्द मुनाफे का वादा कर कई मल्टी-लेवल योजनाओं का जाल बिछाया। पुलिस को शक है कि यह धोखाधड़ी सिर्फ उदयपुर तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी इसका फैलाव हो सकता है। टीमें अब संदिग्ध खातों और कथित पार्टनर्स की पहचान करने में लगी हैं।

“पीड़ितों की बढ़ रही संख्या, पुलिस ने अपील जारी की”**

जैसे-जैसे मामला सुर्खियों में आ रहा है, और भी पीड़ित आगे आकर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि जो भी इस निवेश योजना के जरिए ठगा गया है, वह नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराए। इससे पुलिस को कुल धोखाधड़ी की सही रकम और नेटवर्क का पूरा दायरा समझने में मदद मिलेगी।

“आगे क्या? जांच एजेंसियां सक्रिय, बड़े खुलासों की तैयारी”**

रिमांड की अवधि पुलिस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक अकाउंट्स की फॉरेंसिक जांच, डिजिटल ट्रेल और संदिग्ध कंपनियों के दस्तावेज़ मिलने के बाद मामले में और नाम सामने आ सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और अन्य जांच एजेंसियों को भी शामिल किया जा सकता है।

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