प्रक्रिया-नियमों की गलत व्याख्या कर सदस्यों के अधिकार पर प्रहार लोकतंत्र का अपमान : टीकाराम जूली…
जयपुर, 16 जनवरी।
राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने विधानसभा सचिवालय द्वारा 7 और 9 जनवरी को जारी किए गए बुलेटिन पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सचिवालय ने प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों की गलत व्याख्या करते हुए विधायकों के प्रश्न पूछने के अधिकार पर अनावश्यक पाबंदियाँ लगाई हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधा आघात है।
जूली ने अध्यक्ष को लिखा पत्र, व्यक्त की गहरी नाराज़गी
प्रतिपक्ष के नेता ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा है कि बुलेटिन में लगाए गए प्रतिबंध न केवल नियमों के विरुद्ध हैं, बल्कि यह विधायकों की संवैधानिक जिम्मेदारियों में भी बाधा डालते हैं।
उनका कहना है कि सरकार यदि किसी मामले पर पाँच वर्षों तक कार्रवाई ही नहीं करती, तो विधायक उस मुद्दे पर प्रश्न कैसे न पूछें?
जूली ने कहा—
“विभागों की योजनाएँ, नियम, योजनाओं की प्रगति और ऑनलाइन उपलब्ध डेटा के बारे में जानकारी मांगने से कैसे रोका जा सकता है? यह कटौती नहीं, बल्कि लोकतंत्र का अवमान है।”
विधायक पूरे राज्य से जुड़े प्रश्न पूछने के हकदार—जूली
बुलेटिन में कहा गया है कि प्रश्न केवल किसी विशेष स्थान, विधानसभा क्षेत्र या तहसील तक सीमित रहें। इस पर आपत्ति जताते हुए जूली ने कहा कि
“जब कोई सदस्य विधानसभा के लिए निर्वाचित होता है, तो वह सम्पूर्ण प्रदेश के किसी भी जिले और गांव से संबंधित प्रश्न पूछने का अधिकार रखता है। इसे सीमित करना संविधान के विरुद्ध है।”
उन्होंने उल्लेख किया कि प्रक्रिया नियम 37(2) में 25 शर्तें निर्धारित की गई हैं, लेकिन इनमें कहीं भी ऐसे प्रतिबंध का उल्लेख नहीं है।
शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों पर भी उठाई आपत्ति
जूली ने कहा कि यदि कोई सदस्य पर्ची, स्थगन प्रस्ताव या शून्यकाल के माध्यम से कोई तात्कालिक मुद्दा उठाता है और मंत्री जवाब ही नहीं देते, तो इस प्रक्रिया का औचित्य क्या रह जाता है?
उन्होंने लिखा—
“अगर सरकार जवाब न दे और कार्रवाई न करे, तो यह सदन की गरिमा का अपमान है। सदस्य अपने क्षेत्र और राज्य की समस्याओं को उठाने आते हैं, न कि मौन बैठने।”
उन्होंने यह भी कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव बड़ी मुश्किल से कार्यसूची में शामिल होता है, और फिर भी अगर उसका उचित जवाब न मिले, तो सदस्य स्पष्टीकरण मांगने का पूर्ण अधिकार रखते हैं।
‘लोकसभा ने भी ऐसे निर्देश कभी जारी नहीं किए’ – जूली
जूली ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी ये निर्देश न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि लोकसभा में भी कभी इस तरह की सीमा तय नहीं की गई। उन्होंने इसे “राजतंत्र की ओर बढ़ने का संकेत” बताया।
सरकार पर गंभीर आरोप – “जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश”
प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि
“सरकार पहले ही कई तरीकों से जनता की आवाज़ उठाने पर रोक लगा रही है। अब विधायकों के अधिकार सीमित कर जनता की आवाज विधानसभा में उठाने का रास्ता बंद करना चाहती है।”