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“CBI पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी… ‘आपके पास तो फर्ज़ी अधिकारी हैं’ — अदालत के तीखे सवालों ने सबको चौंकाया”

बड़ी खबर: सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार — “CBI में फर्जी अधिकारी!”

दिल्ली से आई इस बड़ी कानूनी ख़बर ने केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारी विमल नेगी की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBI को बेहद कठोर शब्दों में फटकार लगाई। अदालत ने टिप्पणी की—


“आपके पास तो बिल्कुल फर्ज़ी अधिकारी हैं…”

मामला क्या है: विमल नेगी की मौत पर उठे सवाल

हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में पदस्थ अधिकारी विमल नेगी की रहस्यमयी मौत को लेकर शुरू से ही विवाद रहा। मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी, लेकिन अब कोर्ट को जांच की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति है।अदालत ने साफ कहा कि जांच में कई बुनियादी खामियां हैं और एजेंसी ने अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं निभाया।

कोर्ट की नाराज़गी: “CBI की विश्वसनीयता दांव पर”

जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने CBI के अधिकारियों की पेशी और दस्तावेज़ों पर कई सवाल खड़े किए।
कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा—
“आपके अधिकारी कौन हैं? क्या ये सच में अधिकारी हैं या फर्जी? इस तरह की जांच कैसे स्वीकार की जा सकती है?”

इस टिप्पणी ने एक बार फिर CBI की जांच प्रक्रियाओं और आंतरिक सिस्टम पर बड़ा सवाल लगा दिया है।

अदालत के संकेत: जांच की गुणवत्ता पर सख्त नजर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एजेंसी को यह समझना होगा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने CBI को जांच की खामियों की भरपाई करने और पूरी प्रक्रिया पर फिर से गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए।

CBI से विस्तृत जवाब तलब**

शीर्ष अदालत ने CBI से स्पष्ट और सटीक रिपोर्ट मांगी है।


सुनवाई के अगले दौर में एजेंसी को यह बताना होगा कि—जांच किस स्तर तक हुई , अधिकारी कौन थे और उनकी नियुक्ति पर क्या प्रमाण हैं ,और सबसे महत्वपूर्ण—क्यों अदालत को “फर्जी अधिकारी” जैसी टिप्पणी करनी पड़ी

न्यायपालिका की सख्ती, CBI पर बढ़ा दबाव

CBI देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी है और सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उसके विश्वसनीयता ढांचे पर सीधा प्रहार मानी जा रही है। अब हर किसी की नजर इस बात पर होगी कि—क्या CBI अपनी जांच में खामियों को सुधार पाएगी? क्या विमल नेगी की मौत की गुत्थी को सुलझाया जा सकेगा?

यह मामला अब सिर्फ एक जांच का नहीं, बल्कि एजेंसी की साख का भी बन चुका है।

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