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होर्मुज स्ट्रेट खुला, लेकिन क्या तुरंत खत्म होगी LPG किल्लत?

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच Strait of Hormuz को 15 दिनों के लिए खोलने का फैसला लिया गया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि सवाल बना हुआ है कि क्या इससे भारत में एलपीजी की किल्लत तुरंत दूर हो पाएगी या इसके लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

सीजफायर के बाद खुला अहम समुद्री रास्ता
अमेरिका और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच अस्थायी सीजफायर लागू किया गया है, जिसके तहत 15 दिनों के लिए होर्मुज स्ट्रेट को खोला गया है। इस फैसले से तेल और गैस के जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने की संभावना बनी है। पहले इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक सप्लाई पर गहरा असर पड़ा था। अब सीमित समय के लिए खुले इस रास्ते से बाजारों में कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।

भारत के लिए क्यों है यह रास्ता बेहद अहम
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। India के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अनुमान के मुताबिक भारत लगभग 40% कच्चा तेल, 50% से अधिक एलएनजी और करीब 90% एलपीजी इसी रास्ते से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से देश की सप्लाई चेन पर सीधा दबाव पड़ा।

तुरंत राहत क्यों संभव नहीं
हालांकि जलमार्ग खुलने के बाद राहत की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी संकट तुरंत खत्म नहीं होगा। कई जहाज अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने में समय लगेगा। इसके अलावा सप्लाई चेन को पूरी तरह सामान्य होने, टैंकरों की आवाजाही सुचारु होने और गैस के वितरण में स्थिरता आने में कुछ दिन से लेकर हफ्तों तक का समय लग सकता है। इसलिए राहत धीरे-धीरे ही देखने को मिलेगी।

आने वाले 15 दिन क्यों हैं अहम
यह 15 दिन केवल सप्लाई बहाल करने के लिए ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के लिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समाधान की दिशा में बातचीत की संभावना जताई जा रही है। अगर इस दौरान कोई ठोस समझौता होता है, तो भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सकता है। फिलहाल बाजार और उपभोक्ता दोनों की नजरें इसी पर टिकी हैं कि यह अस्थायी राहत स्थायी समाधान में बदलती है या नहीं।

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