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**500 साल के संघर्ष का सपना हुआ साकार: राम मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराने के बाद पीएम मोदी बोले—“सदियों पुराने घाव आज भर रहे हैं”…

अयोध्या में आज इतिहास का वह अध्याय पूरा हो गया, जिसकी प्रतीक्षा भारत ने आधा सहस्राब्दी तक की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिजीत मुहूर्त में राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराया और इसे भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि “500 वर्षों का तप, संघर्ष और आस्था आज फलित हुई है। सदियों की पीड़ा विराम पा रही है।” मोदी ने ध्वज के 13 आध्यात्मिक अर्थों का उल्लेख करते हुए 2047 तक ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान भी किया।

धर्म ध्वजारोहण के साथ रामनगरी में उमड़ा आस्था का सागर**

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज न सिर्फ अयोध्या, बल्कि पूरा भारत और विश्व ‘राममय’ हो उठा है। उन्होंने बताया कि अब तक 45 करोड़ से अधिक भक्त रामलला के दर्शन कर चुके हैं—जो भारत की आस्था और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत प्रमाण है।

“500 वर्षों की वेदना समाप्त”—पीएम मोदी का भावुक संबोधन**

मोदी ने कहा कि सदियों का संघर्ष और घाव आज भर रहे हैं। उन्होंने इसे उन संतों, राम भक्तों और समाज की आस्था को समर्पित बताया जिन्होंने वर्षों तक राम मंदिर निर्माण के संकल्प को जिंदा रखा।

उन्होंने कहा—
“आज वह अग्नि पूर्णाहुति को प्राप्त हो रही है, जो 500 साल पहले प्रज्वलित हुई थी… यह लक्ष्य कभी आस्था से नहीं डिगा।”

धर्म ध्वजा—भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक**

पीएम मोदी ने कहा कि शिखर पर फहराया गया राम ध्वज सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का ध्वज है।
उन्होंने बताया कि ध्वज पर अंकित ‘कोविदार वृक्ष’ रामराज्य की समृद्धि और न्याय का द्योतक है।

धर्म ध्वजा के 13 आध्यात्मिक अर्थ—संकल्प से सिद्धि तक**

प्रधानमंत्री ने धर्म ध्वज के 13 अर्थ बताते हुए कहा कि यह—

  • संकल्प का प्रतीक है
  • सफलता का संदेश देता है
  • संघर्ष से सृजन की गाथा है
  • सदियों से चले सपनों का साकार रूप है
  • संतों की साधना और समाज की एकजुटता है
  • प्रभु राम के आदर्शों का उद्घोष है
  • सत्य की विजय का आह्वान है
  • “सत्यमेव जयते” का संदेश देता है
  • सत्य को धर्म का मूल बताता है
  • “प्राण जाए पर वचन न जाए” की प्रेरणा देता है
  • कर्म प्रधान जीवन का सिद्धांत सिखाता है
  • भेदभाव और पीड़ा से मुक्ति की कामना करता है
  • और दूर से ही रामलला के दर्शन की अनुभूति कराता है

मोदी ने कहा—“यह ध्वज आने वाली सदियों तक रामराज्य के आदर्शों को याद दिलाता रहेगा।”

‘इक्कीसवीं सदी का संकल्प–2047 तक विकसित भारत’**

मोदी ने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा के समय उन्होंने एक हजार वर्ष के संकल्प की बात कही थी। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्र को केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के भविष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा।

राम—आदर्श, मर्यादा और सत्य का शाश्वत स्वरूप**

पीएम मोदी ने कहा कि प्रभु राम केवल एक देवता नहीं, बल्कि आदर्श, मर्यादा, अनुशासन, साहस और निष्काम कर्म के प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा—“भारत को आत्मगौरव और आत्मविश्वास उसी मार्ग से मिलेगा जिसे राम ने दिखाया।”

“आजादी मिली पर मानसिक गुलामी नहीं”—अंग्रेजी शिक्षा मॉडल पर निशाना**

मोदी ने कहा कि अंग्रेज अधिकारी मैकाले ने भारत को उसकी संस्कृति से काटने की नींव रखी थी।
उन्होंने घोषणा की—

“अगले 10 वर्षों में भारत को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त करके रहेंगे।
2047 में देश एक नए आत्मविश्वास के साथ खड़ा होगा।”

विश्व में भारत की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक शक्ति का संदेश**

ध्वजारोहण को पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक शक्ति, आध्यात्मिक चेतना और वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़ा।
उन्होंने कहा—“राम मंदिर, भारत की आत्मा और इतिहास का पुनर्जन्म है।

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