सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को सबूतों के अभाव में बरी किया गया…
देश को दहला देने वाले 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड में एक बड़ा मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबे समय से जेल में बंद सुरेंद्र कोली को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि जांच और सबूतों में गंभीर खामियां हैं, जिनके आधार पर सजा कायम नहीं रखी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: कोली की तुरंत रिहाई के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर सुरेंद्र कोली किसी और मामले में वांछित नहीं है, तो उसे तुरंत जेल से रिहा किया जाए। अदालत ने माना कि जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली में गंभीर त्रुटियां थीं, और उपलब्ध साक्ष्य इतने कमजोर थे कि उन पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता था।
निठारी कांड की पृष्ठभूमि: देश को हिलाकर रख देने वाला मामला
निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था, जब नोएडा के निठारी गांव में एक घर के पास बच्चों के अवशेष मिले थे। जांच में सामने आया कि कई बच्चों और महिलाओं की हत्या कर शवों को नाले में फेंका गया था। इस सनसनीखेज मामले में कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को आरोपी बनाया गया था।
जांच पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव’
शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि पुलिस और जांच एजेंसियों ने सबूत जुटाने में गंभीर लापरवाही बरती। अदालत ने कहा कि “अपराध जितना गंभीर होता है, उतनी ही मजबूत जांच की आवश्यकता होती है, लेकिन इस मामले में निष्पक्षता नहीं रखी गई।”
न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर उठा सवाल
सुरेंद्र कोली की बरी होने के बाद एक बार फिर देश में जांच एजेंसियों की कार्यशैली और न्यायिक प्रक्रिया पर बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जांच में ही त्रुटियां हों, तो कोई भी अदालत दोषी को सजा नहीं दे सकती। यह फैसला न्याय प्रणाली में सुधार की जरूरत की ओर इशारा करता है।