दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: एमसीडी को 9 टोल प्लाज़ा बंद या शिफ्ट करने का आदेश..
दिल्ली‑एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी (Municipal Corporation of Delhi) को नौ टोल प्लाज़ा अस्थायी रूप से बंद करने या उन्हें स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है, ताकि वाहनों से होने वाला प्रदूषण और जाम कम किया जा सके।
प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने बुधवार को सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली‑एनसीआर में हवा की खराब गुणवत्ता केवल मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टोल प्लाज़ा पर वाहनों की लंबी कतारें वायु प्रदूषण में इजाफा कर रही हैं।
टोल प्लाज़ा क्यों हैं अहम
अदालत ने कहा कि एमसीडी के नौ टोल बूथों पर वाहनों के रुकने और जाम की वजह से धुआँ और स्मॉग बढ़ता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI) ने पूछा कि अगर टोल अस्थायी रूप से जनवरी तक फ्री रखा जा सकता है, तो प्रदूषण पर इसका क्या असर पड़ेगा।
टोल प्लाज़ा हटाने या शिफ्ट करने का विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने एमसीडी और NHAI से कहा है कि टोल प्लाज़ा को स्थानीय ट्रैफिक से दूर स्थानांतरित किया जाए या अस्थायी रूप से बंद किया जाए। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि टोल अस्थायी रूप से बंद होने पर होने वाले राजस्व का एमसीडी को मुआवज़ा दिया जाए।
प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली‑एनसीआर की वायु गुणवत्ता “सीवियर” श्रेणी तक पहुँच चुकी है। इसका कारण वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, पड़ोसी राज्यों से पराली का धुआँ और सीमाई इलाकों की भीड़ है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूर्व नियोजित और तात्कालिक समाधान की आवश्यकता वाला मामला बताया।
प्रशासन की अगली चुनौती
एमसीडी और NHAI अब एक सप्ताह के भीतर अदालत को टोल प्लाज़ा बंद या शिफ्ट करने की योजना सौंपेंगे। साथ ही, अन्य उपाय जैसे वर्क-फ्रॉम-होम, वाहनों की एंट्री नियंत्रण और सड़क-धूल प्रबंधन पर भी तेजी से काम करना होगा।
जनता की चिंता
बच्चे, वरिष्ठ नागरिक और सांस की बीमारी से जूझ रहे लोग लगातार प्रदूषण की स्थिति से परेशान हैं। नागरिक चाहते हैं कि सरकार दीर्घकालिक उपाय लागू करे, न कि केवल मौसमी कदम उठाए। सुप्रीम कोर्ट का आदेश इस चिंता को देखते हुए जारी किया गया है।
आगे की सुनवाई पर निगाहें
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण मामलों पर अगली सुनवाई जनवरी में निर्धारित की है। अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि टोल प्लाज़ा पर यह कदम शुरुआत है, लेकिन दिल्ली‑एनसीआर के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एकीकृत राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता बनी हुई है।