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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सुपरटेक के 16 अटके प्रोजेक्ट्स पूरे करेगा एनबीसीसी, 27 हजार खरीदारों को बड़ी राहत

नोएडा।
दिल्ली-एनसीआर के हजारों घर खरीदारों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई है। शीर्ष अदालत ने सुपरटेक समूह के 16 रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की अनुमति दे दी है। इन परियोजनाओं को अब सरकारी निर्माण एजेंसी एनबीसीसी पूरा करेगी। इस फैसले से करीब 27 हजार से अधिक फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से अपने घर का इंतज़ार कर रहे थे।

एक दशक से अधूरी पड़ी थीं परियोजनाएं

सुपरटेक के ये 16 प्रोजेक्ट्स वर्ष 2010 से 2012 के बीच पूरे होने थे, लेकिन निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका। लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने के कारण हजारों खरीदार आर्थिक और मानसिक दबाव झेल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अब इन अधूरी परियोजनाओं के पूरे होने की राह साफ हुई है।

एनबीसीसी को सौंपी गई जिम्मेदारी, तीन साल की समयसीमा तय

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि सभी 16 परियोजनाएं एनबीसीसी को ट्रांसफर की जाएं। अदालत ने साफ कहा कि एनबीसीसी को तीन वर्षों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा। कोर्ट ने यह भी माना कि सुपरटेक परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में असफल रहा और कंपनी पर फंड के गलत इस्तेमाल के गंभीर आरोप हैं।

एनसीएलएटी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के जून 2022 के आदेश को बरकरार रखा है। एनसीएलएटी ने घर खरीदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को एनबीसीसी को सौंपने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अंतिम आदेश बताते हुए कहा कि कोई अन्य अदालत या फोरम इन निर्देशों के क्रियान्वयन में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद रुका था काम

घर खरीदारों के अनुसार, सुपरटेक समूह के चेयरमैन आर.के. अरोड़ा की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी के बाद इन परियोजनाओं का काम पूरी तरह ठप हो गया था। इसके बाद से 16 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हुए थे, जिससे खरीदारों की परेशानी लगातार बढ़ती गई।

1600 करोड़ की फंडिंग के बावजूद नहीं मिले घर

सुपरटेक को इन परियोजनाओं के लिए ओकट्री फाइनेंशियल से करीब 1600 करोड़ रुपये जुटाने की अनुमति मिली थी। कंपनी ने लगभग 20 हजार फ्लैट खरीदारों को दो साल के भीतर घर देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हो सका।

रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया को मिलेगी गति

निवासियों का कहना है कि एनबीसीसी को परियोजनाएं सौंपे जाने से अब रजिस्ट्री और पजेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। एनबीसीसी संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय कर कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करेगी। खरीदारों ने एनबीसीसी पर भरोसा जताते हुए इस फैसले का स्वागत किया है।

घर खरीदारों के लिए ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय घर खरीदारों, वित्तीय संस्थानों, बैंकों और प्राधिकरणों के हित में माना जा रहा है। वर्षों से इंतज़ार कर रहे हजारों परिवारों के लिए यह फैसला उनके अपने घर का सपना पूरा होने की उम्मीद लेकर आया है।

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