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पेशावर में फिदायीन हमला: परेड करते 150 जवान थे निशाने पर, पाकिस्तान में 11 महीनों में 430 सुरक्षाकर्मी ढेर….

पाकिस्तान एक बार फिर आतंकी हिंसा से दहल गया है। पेशावर स्थित फेडरल कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर सोमवार सुबह हुए फिदायीन हमले में तीन अफसर मारे गए और 11 घायल हो गए। हमलावरों का असली टारगेट सुबह की परेड में मौजूद करीब 150 जवान थे, लेकिन सुरक्षा बलों की तेज़ प्रतिक्रिया ने बड़े नरसंहार को टाल दिया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान में पिछले 11 महीनों में सुरक्षा बलों पर हमले तेज हुए हैं और 430 से ज़्यादा जवान मारे जा चुके हैं।

फेडरल कांस्टेबुलरी मुख्यालय पर बड़ा धमाका

पेशावर के हाई-सिक्योरिटी जोन में सोमवार सुबह दो फिदायीन हमलावरों ने एफसी मुख्यालय को निशाना बनाया। पुलिस के अनुसार एक हमलावर ने मुख्य द्वार पर खुद को उड़ा लिया, जबकि दूसरे को परिसर में घुसने से पहले ही गोली मार दी गई।

परेड ग्राउंड पर थे 150 जवान—काटास्त्रॉफी टली

हमले के समय मुख्यालय के अंदर खुले मैदान में लगभग 150 सुरक्षाकर्मी सुबह की परेड की तैयारी कर रहे थे। अफसरों का कहना है कि यदि हमलावर परेड एरिया तक पहुंच जाता तो हताहतों की संख्या कई गुना अधिक होती। सुरक्षा बलों ने मौके पर त्वरित कार्रवाई कर हमला नाकाम कर दिया।

हमलावरों के डीएनए सैंपल लिए गए, पहचान की जांच जारी

पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फोरेंसिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक हमलावरों के अवशेष से डीएनए सैंपल लिए गए हैं, जिनके आधार पर उनकी पहचान और संभावित विदेशी लिंक की जांच चल रही है।

इस्लामाबाद हमले के 2 सप्ताह बाद फिर बड़ा धमाका

यह हमला उस घटना के ठीक दो हफ्ते बाद हुआ है, जब इस्लामाबाद की अदालत के बाहर एक आत्मघाती हमलावर ने पुलिस वाहन के पास विस्फोट कर 12 लोगों की जान ले ली थी। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां लगातार हाई-अलर्ट पर हैं, लेकिन आतंकी हमले रुक नहीं रहे।

बलूच विद्रोह और टीटीपी की बढ़ती सक्रियता से सुरक्षा तंत्र दबाव में

पाकिस्तान इस वक्त दो प्रमुख मोर्चों—बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही समूहों और टीटीपी से बढ़ते आतंकी हमलों—के चलते भारी दबाव में है। बलूचिस्तान में 2024 में विद्रोह से जुड़ी हिंसा में 782 मौतें दर्ज की गईं।

430 जवान मारे गए—आंकड़े पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर बड़ा सवाल

रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी से अब तक सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले हुए हैं, जिनमें 430 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। सिर्फ बन्नू और खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्रों में सेना और पुलिस पर लगातार हमले पाकिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को उजागर करते हैं।

पाकिस्तान की सुरक्षा नीति पर उठते सवाल….

बार-बार होने वाले फिदायीन हमले संकेत देते हैं कि आतंकी नेटवर्क पहले की तुलना में और अधिक संगठित और आक्रामक हो चुका है। अफगान सीमा से जुड़े इलाके अभी भी सबसे कमजोर कड़ी बने हुए हैं, जहां से आतंकी समूह आसानी से घुसपैठ कर रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पाकिस्तान अपनी आंतरिक राजनीतिक खींचतान और अस्थिरता पर काबू नहीं करता, तो ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं।

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