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दिल्ली-NCR में घुटन भरी हवा: छह दिन तक नहीं मिलेगी राहत, फरीदाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर….

दिल्ली-NCR लगातार ‘नो ब्रीद जोन’ बना हुआ है। हवा इतनी जहरीली है कि फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के कई इलाकों में स्थिति ‘गंभीर’ स्तर से भी ऊपर जा चुकी है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का अनुमान है कि आने वाले छह दिनों तक वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में ही बनी रहेगी। यानी राहत की उम्मीद फिलहाल दूर है।

भारत के 5 शहरों में AQI ने तोड़ी सारी सीमाएं

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं।

फरीदाबाद – AQI 624 (देश में सबसे अधिक)

गाजियाबाद – 617

रोहतक – 587

नोएडा – 560

कैराना – 542

ये सभी शहर ‘गंभीर’ श्रेणी को पार कर चुके हैं। मतलब हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 कण इतने अधिक हैं कि स्वस्थ लोगों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

दिल्ली में सांस लेना हो रहा मुश्किल

राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता लगातार सातवें दिन बेहद खराब है। शुक्रवार सुबह दिल्ली का औसत AQI 373 दर्ज हुआ। प्रदूषण के चलते अस्पतालों में सांस और आंखों में जलन वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह और रात के समय हो रही है, जब प्रदूषण सूचकांक चरम पर पहुंच जाता है।

दिल्ली के ये इलाके सबसे ज्यादा प्रदूषित

कई निगरानी केंद्रों पर AQI 400 के पार मिला, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

AQI 400+ वाले प्रमुख क्षेत्र:

वजीरपुर – 442

बवाना – 430

रोहिणी – 423

आनंद विहार – 416

अशोक विहार – 412

विवेक विहार – 413

इसके अलावा चांदनी चौक, नरेला, आरके पुरम और नेहरू नगर भी लगातार 400 के ऊपर बने हुए हैं।

छह दिन और बिगड़ेगी हवा—मंत्रालय की चेतावनी

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि हवा की गुणवत्ता में किसी भी सुधार की संभावना नहीं है।
प्रदूषण का स्तर अगले छह दिनों तक बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में अटका रहेगा।
इसकी बड़ी वजह हैं—

ठंडी हवाओं की कमी

हवा की धीमी रफ्तार

पराली धुआं

स्थानीय प्रदूषण स्रोत

लोगों के स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार AQI 400+ स्तर पर:

अस्थमा मरीजों को गंभीर अटैक की आशंका

बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

स्वास्थ्य लोगों में भी छाती में दर्द, खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द

लंबे समय में फेफड़ों की क्षमता कम होना

डॉक्टर सलाह दे रहे हैं कि लोग बाहर निकलने से पहले मास्क पहनें और सुबह की वॉक या जॉगिंग से बचें।

सरकारें क्या कदम उठा रही हैं?

हालांकि कुछ क्षेत्रों में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) लागू है, लेकिन प्रदूषण का स्तर अपेक्षा से अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा हालात में सिर्फ अस्थाई उपाय काफी नहीं हैं, और ठोस नीति की जरूरत है।

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