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भारत से शेख हसीना का सियासी हमला: यूनुस को बताया सूदखोर-गद्दार, बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाने का आह्वान


भारत में रहने के बाद पहली बार पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश की राजनीति पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ऑडियो संदेश के जरिए उन्होंने अंतरिम सरकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए। हसीना ने मौजूदा हालात को बांग्लादेश की संप्रभुता और संविधान के लिए “अस्तित्व की लड़ाई” करार दिया।


🟠 भारत से पहला राजनीतिक संदेश

यह संबोधन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह भारत से हसीना का पहला सार्वजनिक राजनीतिक बयान था। इस भाषण ने यह संकेत दिया कि वह विदेश में रहते हुए भी बांग्लादेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का इरादा रखती हैं।


🟠 यूनुस पर सीधा और आक्रामक हमला

‘बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम में प्रसारित अपने भाषण में हसीना ने मुहम्मद यूनुस को “हत्यारा फासीवादी”, “सूदखोर”, “मनी लॉन्डरर” और “सत्ता-लोभी गद्दार” जैसे शब्दों से संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस के नेतृत्व में देश अवैध, हिंसक और विदेशी-प्रेरित शासन की चपेट में है।


🟠 बांग्लादेश को बताया अराजकता का शिकार

हसीना ने दावा किया कि वर्तमान में बांग्लादेश “एक विशाल जेल और मौत की घाटी” में बदल चुका है। उनके अनुसार लोकतंत्र निर्वासन में है, मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है, प्रेस की आज़ादी खत्म हो चुकी है और महिलाओं व अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़ गए हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त बताया।


🟠 सत्ता से हटाए जाने को बताया साजिश

पूर्व प्रधानमंत्री ने 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने को “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया। उन्होंने कहा कि उसी दिन से देश आतंक और अराजकता के दौर में चला गया। उनके मुताबिक यह सिर्फ सरकार बदलने का मामला नहीं, बल्कि मुक्ति संग्राम के मूल्यों पर हमला है।


🟠 विदेशी हितों का आरोप

हसीना ने यूनुस पर बांग्लादेश की ज़मीन और संसाधनों को विदेशी शक्तियों के हवाले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश को बहुराष्ट्रीय संघर्षों की आग में झोंका जा रहा है और यह सीधे तौर पर राष्ट्रीय विश्वासघात है।


🟠 अवामी लीग को बताया लोकतंत्र की असली विरासत

अपने भाषण में हसीना ने अवामी लीग को बांग्लादेश की लोकतांत्रिक और बहुलवादी परंपराओं का एकमात्र वैध संरक्षक बताया। उन्होंने पार्टी को स्वतंत्र बांग्लादेश की सबसे पुरानी और केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बताते हुए समर्थकों से “छिनी हुई मातृभूमि को वापस लेने” का संकल्प दिलाया।


🟠 शेख हसीना की 5 प्रमुख मांगें

हसीना ने देश को “ठीक करने” के लिए पांच मांगें रखीं:

  1. अंतरिम यूनुस प्रशासन को हटाकर लोकतंत्र की बहाली और निष्पक्ष चुनाव
  2. सड़क हिंसा और अराजकता पर पूर्ण विराम
  3. अल्पसंख्यकों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा की गारंटी
  4. राजनीतिक प्रतिशोध वाली कानूनी कार्रवाइयों का अंत
  5. संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग

🟠 अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश

हसीना ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश के लोगों के साथ खड़ा है। उन्होंने समर्थकों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया और कहा कि अंतरिम सरकार जनता की आवाज़ सुनने में विफल रही है।


🟠 भाषण का राजनीतिक महत्व

यह भाषण दिखाता है कि बांग्लादेश की राजनीति किस हद तक ध्रुवीकृत हो चुकी है। हसीना ने इसे सत्ता संघर्ष नहीं बल्कि मुक्ति युद्ध के आदर्शों और अतिवाद के बीच संघर्ष के रूप में पेश किया, जिससे उनके समर्थकों को भावनात्मक रूप से एकजुट करने की कोशिश साफ दिखती है।


🟠 भारत के लिए संकेत

नई दिल्ली में दिया गया यह संदेश भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि शेख हसीना भारत को एक सुरक्षित राजनीतिक मंच मानते हुए बांग्लादेश की दिशा तय करने की कोशिश जारी रखेंगी।

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