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शेख हसीना को ‘मानवता विरोधी अपराध’ में दोषी कर फांसी की सजा — उन्होंने फैसले को बताया “पक्षपाती और राजनीति-प्रेरित”

फैसलाः मौत की सजा

विशेष न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने हसीना को दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों को हिंसा करने का आदेश दिया था, जिससे बड़े पैमाने पर हानि हुई।

न्यायाधिकरण के 453 पन्नों के फैसले में बताया गया है कि उनके शासन ने प्रतिबंधों और हिंसा के जरिए विरोधियों को दबाने की कोशिश की।

हसीना की प्रतिक्रिया: “राजनीति से प्रेरित”

फैसले के तुरंत बाद शेख हसीना ने इसे “धांधली ट्रिब्यूनल” बताया, जो उनकी तरफदारी नहीं करता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह न्याय प्रक्रिया चुनावा­तीक मकसद से चलाई जा रही है और उनकी पार्टी, अवामी लीग, को कमजोर करने का प्रयास है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि मृत्युदंड की मांग “चुनावी सरकार के चरमपंथी तत्वों” की गलत इरादों को दर्शाती है

देश में माहौल और प्रतिक्रिया

न्यायाधिकरण का फैसला सुनाए जाने के बाद ढाका में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, और कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी।

वहीं, अंतरिम सरकार ने भारत से शेख हसीना और अन्य दोषियों को प्रत्यर्पित करने की मांग की है, यह दावा करते हुए कि दोनों “मित्र देशों के लिए दायित्व” बना रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों में भी इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है — कुछ इसे न्याय का ऐहसान बता रहे हैं, तो कुछ इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” कह रहे हैं।


बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी करार देते हुए विशेष न्यायाधिकरण ने फांसी की सजा सुनाई है। अब इस मामले में शेख हसीना की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। शेख हसीना ने न्यायाधिकरण के फैसले को पक्षपाती और राजनीति से प्ररित बताया है। बता दें कि उन्हें सोमवार को ही दोषी पाया गया और मौत की सजा सुनाई गई है।

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को वहां के ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण’ (ICT) ने पिछले साल जुलाई में हुए व्यापक छात्र आंदोलन के दौरान ‘मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप में मौत की सजा सुनायी है। यह अब तक की सबसे कठोर सजा है। न्यायाधिकरण ने सोमवार को यह फैसला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुनाया।

शेख हसीना को ‘मानवता विरोधी अपराध’ में दोषी कर फांसी की सजा — उन्होंने फैसले को बताया “पक्षपाती और राजनीति-प्रेरित”

बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) ने “मानवता के खिलाफ अपराध” के दोषी ठहराते हुए मृत्यु दंड सुनाया है। सोमवार को आए इस ऐतिहासिक फैसले पर हसीना ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में इसे एक “पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित ट्रिब्यूनल” करार दिया है।

बड़ी खबर: फैसलाः मौत की सजा


विशेष न्यायाधिकरण (ICT-BD) ने हसीना को दोषी ठहराते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 2024 में छात्र आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों को हिंसा करने का आदेश दिया था, जिससे बड़े पैमाने पर हानि हुई।

    न्यायाधिकरण के 453 पन्नों के फैसले में बताया गया है कि उनके शासन ने प्रतिबंधों और हिंसा के जरिए विरोधियों को दबाने की कोशिश की।

    हसीना की प्रतिक्रिया: “राजनीति से प्रेरित”


    फैसले के तुरंत बाद शेख हसीना ने इसे “धांधली ट्रिब्यूनल” बताया, जो उनकी तरफदारी नहीं करता।

      उन्होंने आरोप लगाया कि यह न्याय प्रक्रिया चुनावा­तीक मकसद से चलाई जा रही है और उनकी पार्टी, अवामी लीग, को कमजोर करने का प्रयास है।

      इसके अलावा उन्होंने कहा कि मृत्युदंड की मांग “चुनावी सरकार के चरमपंथी तत्वों” की गलत इरादों को दर्शाती है।

      देश में माहौल और प्रतिक्रिया


      न्यायाधिकरण का फैसला सुनाए जाने के बाद ढाका में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, और कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी।

        वहीं, अंतरिम सरकार ने भारत से शेख हसीना और अन्य दोषियों को प्रत्यर्पित करने की मांग की है, यह दावा करते हुए कि दोनों “मित्र देशों के लिए दायित्व” बना रहे हैं।
        मानवाधिकार संगठनों में भी इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है — कुछ इसे न्याय का ऐहसान बता रहे हैं, तो कुछ इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” कह रहे हैं।


        राजनीतिक झमेला और लोकतंत्र पर सवाल

        हसीना बांग्लादेश की एक प्रमुख और विवादास्पद राजनीतिक शख्सियत रही हैं। उन पर लगे आरोपों पर यह फैसला यह दर्शाता है कि देश की नई शक्ति संरचना लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा और सत्ता संतुलन को पुनर्परिभाषित कर सकती है।

        अंतरराष्ट्रीय दबाव: यह कदम न केवल बांग्लादेश के अंदर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहराई से देखा जा रहा है। मृत्युदंड का फैसला और इसके बाद की अपील प्रक्रिया मानवीय अधिकारों और न्याय की निष्पक्षता पर व्यापक बहस को जन्म दे सकती है।

        आगामी चुनावों की राजनीति: यह फैसला अगले संसदीय चुनावों के समीकरणों पर गहरा असर डाल सकता है। हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग के समर्थकों के लिए यह एक बड़ा तहख़ाना हो सकता है।

        कानूनी पहलू: मृत्युदंड सुनाना बहुत गंभीर कदम है। यह देखना रोचक होगा कि हसीना की अपील कैसे आगे बढ़ती है, और क्या यह फैसला उच्च न्यायालयों या अंतरराष्ट्रीय अदालतों में पुनर्विचार के दायरे में आता है।

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