शेख हसीना का बड़ा हमला: बांग्लादेश चुनाव को बताया ‘ढोंग’, दोबारा मतदान की मांग
बांग्लादेश में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वासन में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनाव परिणामों और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक “पूर्व नियोजित नाटक” था। हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर निशाना साधते हुए चुनाव रद्द कर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है।
अवामी लीग के बिना चुनाव पर सवाल
शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग की भागीदारी के बिना कराया गया चुनाव लोकतांत्रिक नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, देश की जनता ने मतदान से दूरी बनाकर इस प्रक्रिया को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव में न तो वास्तविक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा थी और न ही व्यापक जनभागीदारी।
कम मतदान प्रतिशत पर उठाए सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री ने सुबह 11 बजे तक केवल 14.96 प्रतिशत मतदान का हवाला देते हुए कहा कि यह आंकड़ा बताता है कि मतदाताओं ने चुनाव में रुचि नहीं दिखाई। उनका कहना है कि मतदान के “पीक आवर” में भी इतनी कम भागीदारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती है।
धांधली और हिंसा के आरोप
हसीना ने आरोप लगाया कि मतदान से पहले ही कई केंद्रों पर कब्जे, गोलीबारी, मतपत्रों पर जबरन मुहर लगाने और पैसे के बल पर वोट खरीदने की घटनाएं शुरू हो गई थीं। उनके मुताबिक, राजधानी ढाका समेत कई शहरों में मतदान केंद्रों पर सन्नाटा देखा गया, जो कथित धांधली और भय के माहौल की ओर संकेत करता है।
समर्थकों और अल्पसंख्यकों को डराने का दावा
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदायों को मतदान से पहले डराया-धमकाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों को जबरन मतदान केंद्रों तक ले जाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद, उनके अनुसार, बड़ी संख्या में नागरिकों ने मतदान का बहिष्कार किया।
मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप
हसीना ने विशेष रूप से ढाका की मतदाता सूची में असामान्य वृद्धि को संदिग्ध बताया। उन्होंने कहा कि मतदाता संख्या में अचानक बढ़ोतरी चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
यूनुस सरकार पर असंवैधानिक कब्जे का आरोप
शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस पर सत्ता पर “अवैध और असंवैधानिक” तरीके से काबिज होने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि अंतरिम सरकार इस्तीफा दे और एक निष्पक्ष कार्यवाहक सरकार के तहत सभी दलों की भागीदारी से नए सिरे से चुनाव कराए जाएं।
राजनीतिक बंदियों की रिहाई और प्रतिबंध हटाने की मांग
उन्होंने राजनीतिक बंदियों, शिक्षकों और पत्रकारों की रिहाई की मांग की। साथ ही अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध हटाने और सभी दलों को बराबरी का मौका देने की अपील की, ताकि भविष्य में स्वतंत्र और समावेशी चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।
राजनीतिक परिदृश्य पर संभावित असर –
विश्लेषकों के अनुसार, शेख हसीना के इन आरोपों से बांग्लादेश की राजनीति में ध्रुवीकरण और गहरा सकता है। कम मतदान प्रतिशत और विपक्ष की अनुपस्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल खड़े कर सकती है। यदि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह बढ़ता है, तो देश में राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरिम सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या किसी स्वतंत्र जांच या पुनर्मतदान की दिशा में कदम उठाए जाते हैं।