Shashi Tharoor ने सीएम पद की अटकलों पर लगाया विराम
केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह न तो चुनाव लड़ रहे हैं और न ही सीएम पद के दावेदार हैं। थरूर का मानना है कि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री का चयन केवल निर्वाचित विधायकों में से ही होना चाहिए। उनके इस बयान से पार्टी के भीतर चल रही संभावित खींचतान पर भी विराम लगा है और संगठन को एकजुट होकर चुनाव लड़ने का संदेश मिला है।
United Democratic Front को एकजुट रखने पर जोर
थरूर ने चुनाव से पहले गठबंधन की एकजुटता को सबसे अहम बताया। उन्होंने कहा कि पूरा यूडीएफ गठबंधन एक तालमेल के साथ काम कर रहा है और यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। Rahul Gandhi की सलाह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, अगर गठबंधन को 140 में से 85 से 100 सीटें मिलती हैं, तो यह एक मजबूत जनादेश माना जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य विपक्षी खेमे के खिलाफ सामूहिक शक्ति का प्रदर्शन करना है।
बिना सीएम चेहरे के भी चुनाव जीतने का भरोसा
थरूर ने यह भी कहा कि कांग्रेस बिना किसी घोषित मुख्यमंत्री चेहरे के भी चुनाव जीतने की क्षमता रखती है। उनका मानना है कि पार्टी को किसी एक व्यक्ति के बजाय अपने एजेंडे, विचारधारा और कार्यशैली के आधार पर जनता के बीच जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बदलते समय में चुनाव अधिक “राष्ट्रपति शैली” के होते जा रहे हैं, जहां चेहरों का महत्व बढ़ रहा है, फिर भी केरल में कांग्रेस की जमीनी पकड़ इतनी मजबूत है कि वह इस चुनौती को पार कर सकती है।
पार्टी नेतृत्व पर भरोसा, जीत के बाद होगा नेता चयन
सीएम चेहरे को लेकर उठे सवालों पर थरूर ने कहा कि कांग्रेस की परंपरा रही है कि चुनाव के बाद विधायक दल ही अपना नेता चुनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी नेतृत्व का यही रुख है और उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि पहले चुनाव जीता जाएगा और फिर निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है और आंतरिक सहमति भी बनती है।