मुस्कराए, हाथ हिलाया और भागते हुए पहुंचे… लंबे ब्रेक के बाद कांग्रेस की बैठक में दिखे शशि थरूर
कई बैठकों से दूरी और पार्टी लाइन से अलग बयानों के बीच आखिरकार कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक में नजर आए. तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में शामिल होने इंदिरा भवन पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया.
🟡 लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस बैठक में पहुंचे थरूर
लंबे समय से कांग्रेस की बैठकों से दूर चल रहे शशि थरूर आखिरकार पार्टी के शीर्ष मंच पर दिखाई दिए. जैसे ही वे कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे, मीडिया की नजरें उन पर टिक गईं. थरूर ने मुस्कराते हुए पहले हाथ जोड़े, फिर हाथ हिलाया और तेजी से बैठक स्थल के अंदर चले गए.
🟡 पिछली कई बैठकों में क्यों नहीं थे मौजूद?
शशि थरूर हाल की कई अहम कांग्रेस बैठकों से नदारद रहे थे.
- संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति बैठक
- 18 नवंबर को हुई पार्टी की अहम बैठक
- राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई लोकसभा सांसदों की बैठक
इन सभी बैठकों में उनकी गैरहाजिरी ने पार्टी के भीतर सवाल खड़े कर दिए थे.
🟡 गैरहाजिरी पर क्या देते रहे हैं सफाई?
थरूर हर बार अपनी अनुपस्थिति को लेकर पहले से सूचना देने की बात कहते रहे हैं. शीतकालीन सत्र की रणनीति बैठक में उन्होंने बताया था कि वे केरल में अपनी वृद्ध मां के साथ हैं. हालांकि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी वाली बैठकों से दूरी को लेकर चर्चाएं फिर भी जारी रहीं.
🟡 पार्टी लाइन से अलग बयानों ने बढ़ाई अटकलें
पिछले कुछ समय से शशि थरूर के बयान कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग नजर आए हैं. केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सार्वजनिक तारीफ और विदेश नीति से जुड़े उनके बयान पार्टी के भीतर असहजता का कारण बने. इसी वजह से यह चर्चा भी तेज हुई कि वे पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं.
🟡 पुतिन कार्यक्रम में शामिल होना भी बना मुद्दा
थरूर उस वक्त भी चर्चा में आए थे जब वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे. खास बात यह रही कि इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को आमंत्रित नहीं किया गया था, जिससे राजनीतिक संकेतों को लेकर बहस छिड़ गई थी.
शशि थरूर की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक में मौजूदगी यह संकेत देती है कि पार्टी और थरूर के बीच संवाद का रास्ता फिलहाल खुला है. हालांकि, उनकी हालिया गैरहाजिरी और स्वतंत्र रुख ने कांग्रेस के भीतर असहज सवाल जरूर खड़े किए हैं. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह मौजूदगी केवल औपचारिक है या फिर रिश्तों में आई खटास को कम करने की कोशिश.