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शंकराचार्य विवाद: अदालत के आदेश पर पॉक्सो में केस दर्ज, बयानबाज़ी से बढ़ी सियासत

क्या है पूरा मामला?

प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में अदालत के आदेश पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह केस पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुआ है। एफआईआर में शंकराचार्य के शिष्य मुकुंदानंद का नाम भी शामिल किया गया है।

अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

शिकायतकर्ता की अर्जी पर सुनवाई के बाद अदालत ने झूंसी पुलिस को मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद झूंसी थाने में विधिवत एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत शुरू कर दी गई है।

शंकराचार्य का बयान: ‘गिरफ्तारी हुई तो समझूंगा राजनीतिक इच्छा’

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने एबीपी न्यूज से बातचीत में कहा कि यदि उनकी गिरफ्तारी होती है तो वह इसे राजनीतिक इच्छा से प्रेरित मानेंगे। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उनके चरित्र पर सवाल उठाने की कोई वजह नहीं है।

पॉक्सो एक्ट के तहत जांच की प्रक्रिया

यह मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज होने के कारण संवेदनशील श्रेणी में आता है। कानून के मुताबिक, ऐसे मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखी जाती है और जांच में विशेष सतर्कता बरती जाती है। पुलिस पीड़ित पक्ष के बयान, साक्ष्य और उपलब्ध डिजिटल/दस्तावेजी प्रमाणों की जांच कर रही है।

सियासी हलचल और बयानबाज़ी तेज

शंकराचार्य के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। मामला सामने आने के बाद इसे लेकर अलग-अलग दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक रूप से जांच को प्रभावित करने का दावा स्वीकार नहीं किया गया है।

अब तक की स्थिति (लेटेस्ट अपडेट)

  • अदालत के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज
  • केस पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज
  • शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के नाम एफआईआर में शामिल
  • पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की
  • शंकराचार्य ने आरोपों को खारिज किया, गिरफ्तारी को राजनीतिक बताया
  • आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर

महत्वपूर्ण तथ्य

यह मामला अभी जांच के अधीन है। आरोप सिद्ध होना अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल किसी को दोषी ठहराया जाना न्यायिक रूप से उचित नहीं है।

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