शकील अहमद ने छोड़ी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता, बिहार चुनाव के बाद बड़ा झटका पार्टी को…
बिहार विधानसभा चुनाव के समापन के तुरंत बाद कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अहमद ने अपने पत्र में लिखा कि उन्होंने यह निर्णय “भारी मन” से लिया है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गया था।
चुनाव खत्म होते ही बड़ा फैसला
बिहार चुनाव की मतदान प्रक्रिया खत्म होते ही शकील अहमद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपना इस्तीफा सौंपा।
अहमद ने पत्र में लिखा— “मैं नहीं चाहता था कि मेरे इस्तीफे से चुनाव के दौरान पार्टी को कोई नुकसान हो या एक भी वोट प्रभावित हो, इसलिए मैंने परिणाम से पहले यह कदम नहीं उठाया।”
उनके इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
विचारधारा से नहीं, नेतृत्व से असहमति
शकील अहमद ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराज़गी पार्टी की विचारधारा से नहीं बल्कि नेतृत्व के तौर-तरीकों से है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ मौजूदा पदाधिकारी वरिष्ठ नेताओं को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रख रहे हैं।
उनके मुताबिक, “पार्टी में अब सम्मानजनक संवाद और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा कम हो गई है।”
किसी दूसरी पार्टी में नहीं होंगे शामिल..?
अहमद ने यह भी साफ किया कि वह कांग्रेस छोड़ने के बाद किसी अन्य राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगे।
उन्होंने लिखा कि उनका परिवार पीढ़ियों से कांग्रेस से जुड़ा रहा है और वे आज भी पार्टी की नीतियों और मूल्यों में विश्वास रखते हैं।
“मैं कांग्रेस की विचारधारा से जुड़ा रहूंगा, लेकिन मौजूदा संगठनात्मक ढांचे के साथ नहीं,” उन्होंने लिखा।
शकील अहमद का इस्तीफा कांग्रेस के लिए बिहार में एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका माना जा रहा है।
यह घटना संकेत देती है कि वरिष्ठ नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है और पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना कांग्रेस को अपने संगठनात्मक ढांचे पर गंभीरता से पुनर्विचार करने को मजबूर कर सकती है।
अहमद ने कहा कि वह सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे, लेकिन किसी दल की राजनीति में शामिल नहीं होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस को अब ऐसे वरिष्ठ नेताओं को वापस जोड़ने और संगठनात्मक पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत है ताकि पार्टी के भीतर भरोसे का माहौल बन सके।
शकील अहमद का यह कदम न केवल बिहार कांग्रेस के लिए बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चेतावनी है कि पार्टी को अपने वरिष्ठ और अनुभवी चेहरों को सम्मानजनक भूमिका देनी होगी। अन्यथा, इस तरह के इस्तीफे संगठन की जड़ों को कमजोर कर सकते हैं।