अरावली बचाओ” के नारों के बीच रामगढ़ की पहाड़ियां लहूलुहान, रात के अंधेरे में अवैध खनन का खुला खेल..
प्रदेश में जहां एक ओर मंचों से “सेव अरावली” के संकल्प दोहराए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अलवर जिले के रामगढ़–नौगांवा क्षेत्र में अरावली पर्वतमाला लगातार खनन माफिया के हमलों से कराह रही है। हालात यह हैं कि रात होते ही पहाड़ों पर धमाकों की गूंज सुनाई देती है, लेकिन प्रशासन की आंखें बंद और कान बहरे नजर आ रहे हैं।
रामगढ़–नौगांवा की पहाड़ियां बनीं खनन माफिया का शिकार
डाबरी पंचायत और आसपास के इलाकों में अरावली की पहाड़ियां अब प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि अवैध खनन का अड्डा बन चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया बेखौफ होकर पहाड़ों को काट रहा है और किसी को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है।
रात के अंधेरे में ब्लास्टिंग, दिन में खामोशी
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही अंधेरा छाता है, पहाड़ियों पर धमाकों का सिलसिला शुरू हो जाता है। भारी ब्लास्टिंग से पूरा इलाका कांप उठता है, लेकिन न खनन विभाग की टीम दिखाई देती है और न ही पुलिस की गश्त। ब्लास्टिंग के बाद पत्थरों से लदी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रोलियां खुलेआम हरियाणा की ओर रवाना हो जाती हैं।
ग्रामीणों के आरोप – “कागजों में गश्त, जमीन पर माफिया”
सम्मन बास निवासी सचिन मेघवाल का कहना है कि उन्होंने कई बार अवैध खनन की सूचना प्रशासन को दी, लेकिन हर बार केवल औपचारिकता निभाई गई। वहीं ग्रामीण सुरेश कुमार का आरोप है कि वैध लीज की आड़ में कई गुना ज्यादा अवैध खनन किया जा रहा है, और जिम्मेदार विभाग जानबूझकर चुप्पी साधे हुए हैं।
पहाड़ों के साथ भविष्य भी हो रहा खत्म
विशेषज्ञों और ग्रामीणों का मानना है कि यह अवैध खनन सिर्फ पहाड़ों को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है। क्षेत्र में भू-जल स्तर तेजी से गिर रहा है, जंगल उजड़ रहे हैं और जैव विविधता पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
अरावली बचाओ अभियान” के तहत ग्रामीणों का प्रदर्शन
शनिवार को सम्मन बास गांव में ग्रामीणों ने “अरावली बचाओ अभियान” के तहत जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि अब सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने मांग की कि खनन माफिया पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो और उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, जो आंख मूंदकर इस लूट को संरक्षण दे रहे हैं।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
इस विरोध प्रदर्शन में मनोहरी लाल मेघवाल, बुद्ध सिंह, राजेंद्र, गुड्डू, बिजेंद्र, पूरन, सुरेश राजपूत, सचिन गुर्जर, करण गुर्जर, नेतराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। सभी ने एक सुर में अरावली को बचाने की मांग उठाई।